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March 24, 2026

हिमाचल के किसान पहुंचे दिल्ली, अपने हक के लिए निकाल रहे जन आक्रोश रैली

नए श्रम कानूनों का कड़ा विरोध

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Himachal News

नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश का 5500 करोड़ रुपए का सेब उद्योग आज एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। अपनी रोजी-रोटी और हकों की लड़ाई लड़ने के लिए हिमाचल के हजारों किसान और बागवान आज दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'जन आक्रोश रैली' निकाल रहे हैं। बीती रात ही बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं दिल्ली कूच कर चुके हैं।

क्या है विवाद की मुख्य जड़ ?

इस बड़े प्रदर्शन के पीछे सबसे मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील है। सरकार ने अमेरिकी सेब पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा, यूरोपीय देशों से आने वाले सेब पर भी शुल्क में भारी कटौती की गई है।

 

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बागवानों का डर: माकपा नेता सोहन ठाकुर का कहना है कि जब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजारों में बिकेंगे, तो हिमाचल के स्थानीय सेब की मांग गिर जाएगी। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ेगा और हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था पूरी तरह उजड़ सकती है।

रामलीला मैदान में उठेंगे ये प्रमुख मुद्दे

ठियोग के पूर्व विधायक राकेश सिंघा के नेतृत्व में 3000 से अधिक बागवान इस रैली में शामिल हो रहे हैं। केवल सेब ही नहीं बल्कि किसानों और मजदूरों से जुड़े कई अन्य गंभीर मुद्दे भी इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं:

  • मनरेगा का पुराना स्वरूप: प्रदर्शनकारी मनरेगा योजना को उसके पुराने और प्रभावी रूप में बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
  • नए श्रम कानून: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानूनों का कड़ा विरोध किया जा रहा है। बागवानों का मानना है कि ये कानून मजदूरों के अधिकारों को छीनते हैं।
  • किसानों की बर्बादी: राकेश सिंघा का आरोप है कि अमेरिका के साथ की जा रही ट्रेड डील सीधे तौर पर देश के किसान को बर्बाद करने वाली है।

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गांव-गांव में जगाई गई अलख

दिल्ली कूच करने से पहले हिमाचल के कोने-कोने में नुक्कड़ सभाओं और नाटकों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया। बागवानों को बताया गया कि कैसे विदेशी सेब का भारत में आना उनके बगीचों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

देशभर से मिलेगा समर्थन

ये रैली केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के आह्वान पर आयोजित इस रैली में देश के अन्य राज्यों से भी हजारों किसान और मजदूर शामिल हो रहे हैं।

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