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May 8, 2026
शातिरों के निशाने पर देवभूमि की बेटियां, क्रा.इम दर में महाराष्ट्र-गुजरात से आगे हिमाचल; चौंका देंगे आंकड़ें
छब्त्ठ की रिपोर्ट में खुलासा हिमाचल में बेटियों से बढ़ते अपराध ने तोड़े पिछले सारे रिकॉर्ड
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शिमला। कभी देश के सबसे शांत और सुरक्षित राज्यों में गिने जाने वाले हिमाचल प्रदेश की छवि अब बढ़ते अपराध ने पूरी तरह से बदल दी है। हाल के वर्षों में बढ़ते अपराध, खासकर हत्या, दुष्कर्म और नाबालिग लड़कियों से जुड़े मामलों ने देवभूमि की पहचान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में नाबालिग लड़कियों को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट "क्राइम इन इंडिया 2024" ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उन्होंने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता की भी नींद उड़ा दी है।
आंकड़ों का सबसे डरावना पहलू नाबालिग लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों से जुड़ा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के अपहरण और जबरन विवाह से जुड़े मामलों का अनुपात देश के बड़े राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात से भी अधिक दर्ज किया गया है। यह तथ्य इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से हिमाचल इन दोनों राज्यों के मुकाबले काफी छोटा है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हिमाचल में ऐसे 90 मामले दर्ज हुए, जिनमें 91 नाबालिग लड़कियां प्रभावित हुईं। यहां अपराध दर 4.2 दर्ज की गई, जो प्रति लाख आबादी के हिसाब से काफी अधिक है। इसके विपरीत विशाल भौगोलिक क्षेत्र होने के बाद भी महाराष्ट्र में 44 मामले और 0.1 की दर रही। जबकि गुजरात में 422 मामलों के बावजूद 2.0 की अपराध दर सामने आई।
NCRB की रिपोर्ट में अन्य राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। बिहार 6214 मामलों और 13.1 की दर के साथ शीर्ष पर है, जबकि पंजाब में अपराध दर 15.5 रिकॉर्ड की गई। असम (4.3) का आंकड़ा हिमाचल के लगभग करीब है। लेकिन हिमाचल के लिए चिंता की बात यह है कि एक कल्याणकारी राज्य होने के बावजूद यहां की मासूम बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं।

जांच में सामने आया है कि अपराधी अब सीधे वार करने के बजाय डिजिटल रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फर्जी पहचान, सोशल मीडिया पर ऑनलाइन दोस्ती और फिर शादी का झांसा देकर ग्रामीण इलाकों की भोली-भाली लड़कियों को जाल में फंसाया जा रहा है। भौगोलिक चुनौतियों के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में परिवारों को घटना की भनक तक नहीं लग पाती, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि देवभूमि में बढ़ते इस क्राइम ग्राफ को रोकने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं होगी। स्कूल स्तर पर साइबर जागरूकता, अभिभावकों की सतर्कता और पंचायत स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। साथ ही प्रशासन को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर रखने और बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
हिमाचल प्रदेश जिसे कभी शांत और सुरक्षित जीवन के लिए जाना जाता था, अब बढ़ते अपराधों के चलते नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। NCRB की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो देवभूमि की पहचान पर और गहरा असर पड़ सकता है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो देवभूमि की यह शांत वादियां केवल अपराध की कहानियों के लिए जानी जाएंगी।