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May 8, 2026
सुक्खू सरकार नहीं देगी निजी अस्पतालों का लंबित 200 करोड़! भुगतान पर लगाई रोक; जानें क्यों
सुक्खू सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक, निजी अस्पतालों के 200 करोड़ फंसे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रदेश के निजी अस्पतालों को एक बड़ा झटका देते हुए हिमकेयर योजना के तहत लंबित करीब 200 करोड़ रुपये के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार के इस सख्त फैसले से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों की मुश्किलें बढ़ गई हैंए जो लंबे समय से अपने बकाये बिलों के भुगतान की आस लगाए बैठे थे।
दरअसल, हिमकेयर योजना में हुए कथित 110 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की विजिलेंस जांच के चलते सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुक्खू के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि जब तक विजिलेंस की जांच पूरी नहीं होती और दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक किसी भी निजी अस्पताल को एक भी रुपया जारी नहीं किया जाएगा।
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प्रदेश के दर्जनों निजी अस्पताल पिछले कई महीनों से हिमकेयर के तहत उपचार किए गए मरीजों के बिलों के सेटलमेंट की मांग कर रहे थे। अस्पतालों का तर्क था कि भुगतान न होने से उन्हें स्टाफ की सैलरी और दवाओं के खर्च निकालने में भारी परेशानी हो रही है। हालांकि, सुक्खू सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के पैसे की पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा।
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सरकार को अंदेशा है कि जांच पूरी होने से पहले भुगतान करने पर वित्तीय अनियमितताएं करने वाले संस्थानों को लाभ मिल सकता है। फिलहाल 200 करोड़ की भारी-भरकम राशि पर रोक लगने से स्वास्थ्य क्षेत्र में खलबली मची हुई है और निजी अस्पतालों के प्रबंधकों की रातों की नींद उड़ गई है।
प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में फर्जी बिलिंग, उपचार संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। जांच एजेंसियां अस्पतालों द्वारा भेजे गए मेडिकल क्लेम और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। बताया जा रहा है कि डिजिटल डेटा और फिजिकल फाइलों में अंतर भी सामने आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए विजिलेंस ने हाल ही में ऑडिट और स्वास्थ्य एजेंसियों से जुड़े कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ की है। घंटों चली इस प्रक्रिया में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में बिना पर्याप्त जांच के बिलों को प्राथमिकता से मंजूरी दी गईए जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि कुछ निजी अस्पतालों के दावों को बिना किसी गहन सत्यापन के प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जा रही थी। विजिलेंस अब इस बात की तह तक जा रही है कि किन अधिकारियों या कर्मियों की मिलीभगत से निजी अस्पतालों के बढ़ें बिलों को पास कराया गया।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि घोटाले को अंजाम देने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक फाइलों के साथ सुनियोजित तरीके से खिलवाड़ किया गया। विजिलेंस अब डिजिटल पेमेंट ट्रेल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि कमीशनखोरी और वित्तीय लेनदेन के ठोस सबूत जुटाए जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता चाहती है। विजिलेंस की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि कौन से अस्पताल पाक.साफ हैं और किनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। तब तक सुक्खू सरकार ने खजाने का ताला बंद रखने का निर्णय लिया हैए जिससे निजी अस्पतालों का संकट और गहराना तय माना जा रहा है।