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May 7, 2026
अब तक 1350 स्कूल बंद कर चुकी है सरकार

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद करने और उन्हें दूसरे स्कूलों में मर्ज करने की तैयारी ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। प्रदेश सरकार अब करीब 100 और स्कूलों पर कार्रवाई करने की योजना बना रही है।
इससे पहले भी सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल में लगभग 1350 स्कूल बंद कर चुकी है, जिसके बाद कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। स्कूल शिक्षा निदेशालय हिमाचल प्रदेश की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी इसकी पुष्टि की है। प्रस्ताव में उन स्कूलों को बंद करने या नजदीकी शिक्षण संस्थानों में मर्ज करने की बात कही गई है, जहां विद्यार्थियों की संख्या शून्य है या पांच से कम छात्र अध्ययन कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि बेहद कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को चलाना संसाधनों के लिहाज से व्यवहारिक नहीं है। ऐसे स्कूलों में अध्यापक, भवन और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च अधिक हो रहा है। जबकि लाभ बहुत कम विद्यार्थियों तक सीमित है। इसी कारण विभाग इन स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में समायोजित करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
हालांकि, सरकार सभी स्कूलों पर एक जैसा फैसला लागू नहीं करना चाहती। पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित कई स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को दूसरे स्कूल तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। ऐसे मामलों को अभी समीक्षा के दायरे में रखा गया है और अंतिम निर्णय से पहले भौगोलिक परिस्थितियों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से फैसले ले रही है। उन्होंने बताया कि कुछ स्कूलों का स्तर घटाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। सरकार का दावा है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और छात्रों को अधिक सुविधाओं वाले संस्थानों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा।
प्रदेश मंत्रिमंडल पहले ही मुख्यमंत्री को स्कूल बंद करने और मर्ज करने से जुड़े फैसले लेने के लिए अधिकृत कर चुका है। ऐसे में इस प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट में लाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही संबंधित आदेश जारी किए जा सकते हैं।
उधर, इस मुद्दे को लेकर फिर से विवाद गहराने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले भी कई क्षेत्रों में लोगों ने स्कूल बंद करने के फैसलों का विरोध किया था। स्थानीय लोगों का कहना था कि स्कूल बंद होने से ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। विपक्ष ने भी सरकार को इस मुद्दे पर लगातार घेरा है और इसे शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया है।
अब प्रदेशभर की नजर सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है। एक ओर सरकार इसे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच कम होने की आशंका भी लोगों को चिंतित कर रही है। आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।