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May 9, 2026

कर्ज में डूबे हिमाचल को अब लॉटरी का सहारा- 27 साल बाद फिर शुरू करने जा रही सरकार, जानें

धूमल सरकार ने बंद की थी लॉटरी, अब सुक्खू सरकार करेगी दोबारा शुरू

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शिमला। आर्थिक संकट और लगातार बढ़ते कर्ज के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार अब राजस्व बढ़ाने के नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश में करीब 27 साल बाद एक बार फिर लॉटरी शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम और आधुनिक सॉफ्टवेयर भी तैयार कर लिया है। माना जा रहा है कि स्थानीय निकाय चुनावों की आचार संहिता हटते ही लॉटरी योजना को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

कैबिनेट से मिल चुकी मंजूरी

दरअसल 31 जुलाई 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने प्रदेश में लॉटरी पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला लिया था। सरकार का मानना है कि मौजूदा वित्तीय हालात में नए राजस्व स्रोत तलाशना बेहद जरूरी हो गया है। लगातार बढ़ते कर्ज और आर्थिक दबाव के चलते यह फैसला लिया गया है।

पूरी तरह डिजिटल होगी लॉटरी

इस बार सरकार लॉटरी संचालन को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने का दावा कर रही है। इसके लिए विशेष ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसके जरिए टिकट वितरण, ड्रा प्रक्रिया और भुगतान सिस्टम को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धांधली की संभावना कम होगी।

 

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हालांकि सरकार ने साफ किया है कि खुले बाजार में पहले की तरह लॉटरी टिकट नहीं बेचे जाएंगे। लॉटरी केवल ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगी। हां, विशेष मौकों पर लकी ड्रा की व्यवस्था की जा सकती है, जो चिन्हित स्थानों पर उपलब्ध रहेगा।

कर्ज में डूबा प्रदेश

हिमाचल प्रदेश इस समय भारी आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। प्रदेश पर करीब 1 लाख 10 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है। हालात यह हैं कि सरकार को खर्च चलाने के लिए लगातार ऋण लेना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 900 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है, जबकि 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण की तैयारी भी चल रही है।

 

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सरकार को उम्मीद है कि लॉटरी शुरू होने से हर साल 75 से 100 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। हालांकि यह रकम कुल कर्ज के मुकाबले कम है, लेकिन सरकार इसे राजस्व बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रही है।

1999 में बंद हुई थी लॉटरी

गौरतलब है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने सामाजिक कारणों का हवाला देते हुए हिमाचल में लॉटरी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय कई परिवारों, खासकर महिलाओं ने शिकायत की थी कि लोग लॉटरी की लत में घर की कमाई तक गंवा रहे हैं, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया था।

 

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अब करीब तीन दशक बाद सरकार एक बार फिर लॉटरी को प्रदेश में वापस लाने जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार आर्थिक जरूरत और सामाजिक प्रभावों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।

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