मंडी। हिमाचल में महाशिवरात्रि की तैयारियां सोमवार से शुरू हो गईं। छोटी काशी, यानी मंडी जनपद के आराध्य देव कमरूनाग सोमवार को देवता की छड़ी के साथ मंडी रवाना हो गए। 9 दिन की पैदल यात्रा के बाद वे 25 जनवरी को मंडी पहुंचेंगे। उसी दिन शिवरात्रि के महोत्सव का आगाज हो जाएगा। महाशिवरात्रि पर इस बार 216 देवी-देवता भाग लेंगे। 

पैदल मंडी की ओर रवाना

कांढी में देवता की पवित्र छड़ी की पहले पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद देवता कमरूनाग अन्य देवी-देवताओं के साथ पैदल मंडी के लिए निकल पड़े। देव कमरूनाग के कारदार काहन सिंह ने बताया देव कमरुनाग 9 दिनों की पैदल यात्रा के बाद 25 फरवरी को शाम 3 बजे मंडी पहुंचेंगे। मंडी पहुंचने पर डीसी मंडी अपूर्व देवगन उनका स्वागत करेंगे। 

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भक्तों के घर पर रूककर उन्हें आशीर्वाद देंगे 

9 दिनों की इस यात्रा के दौरान देव कमरुनाग रास्ते में अपने भक्तों के घरों पर रूक कर उन्हें आशीर्वाद देंगे। देवता के कारदार काहन सिंह ने बताया, "देव कमरूनाग मंडी के लिए रवाना हो गए हैं। रास्ते में बहुत से भक्तों ने देवता को अपने घर पर आमंत्रित किया है, जहां देवता मेहमाननवाजी करते हुए मंडी आएंगे।"

शिवरात्रि महोत्सव का आगाज

देव कमरूनाग के कारदार काहन सिंह ने बताया कि बड़ा देव कमरूनाग मंडी जनपद के आराध्य देव हैं। देव कमरूनाग साल में सिर्फ एक बार मंडी आते हैं। वे 8 दिन तक देटारना माता मंदिर में विराजमान रहते हैं। कमरूनाग को हिमाचल के प्रमुख देवताओं में से एक माना जाता है। वे बारिश और संपत्ति के देवता माने जाते हैं। यह मान्यता है कि शिवरात्रि मेले के दौरान वे अन्य देवताओं की अगुवाई करते हैं। मंडी रियासत के समय से यह परंपरा चली आ रही है कि देव कमरूनाग सबसे पहले राजा के दरबार में आते थे और अन्य देवताओं को आशीर्वाद देते थे। मंडी रियासत के अधिष्ठाता देवता राज माधव राय (भगवान कृष्ण) को भी देव कमरूनाग का विशेष संरक्षण प्राप्त था।

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देव कमरूनाग और लोकमान्यताएं

कहा जाता है कि महाभारत काल के योद्धा बर्बरीक का ही दूसरा रूप देव कमरूनाग हैं। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने जब बर्बरीक का सिर काटकर वरदान दिया था, तब उनका सिर हिमाचल के इस पर्वतीय क्षेत्र में स्थापित किया गया। कमरूनाग झील को "सोने-चांदी की झील" भी कहा जाता है, क्योंकि भक्तगण अपनी मनोकामनाएँ पूरी होने के लिए इसमें सिक्के डालते हैं।

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