शिमला। हिमाचल सरकार ने राज्य में 5 करोड़ पर्यटकों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 4,662 होटल और 4,146 होमस्टे की संख्या पांच गुनी कम है। सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए होटलों की जगह होमस्टे को प्राथिमकता देते हुए नए नियम तो बनाए हैं, लेकिन मनमाने तरीके से तय की गई फीस से लोगों को होमस्टे की जगह होटल खोलना ज्यादा मुनासिब लग रहा है। शहरी क्षेत्रों में 10 कमरों वाले होटल का सालाना रजिस्ट्रेशन 1000 रुपए में होता है, जबकि 4-6 कमरों वाले होमस्टे के लिए यह दर 12000 रुपए तय की गई है।
होमस्टे को कैसे बढ़ावा देगी सुक्खू सरकार ?
सुक्खू सरकार के इस गणित के हिसाब से होम स्टे के मासिक पंजीकरण की फीस 1000 रुपए और होटल के एक कमरे की फीस 83 रुपए पड़ रही है। होटल के रजिस्टेशन की फीस 3 साल के लिए 3000 रुपए है, जबकि होमस्टे के लिए फीस 36000 रुपए है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसी मनमानी फीस वसूलकर हिमाचल सरकार होमस्टे को कैसे बढ़ावा दे सकती है ?
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होम स्टे की रिन्यूअल फीस 50 फीसदी ज्यादा
इतना ही नहीं, होटलों की नवीनीकरण फीस पंजीकरण फीस की 50 फीसदी है जबकि होम स्टे के लिए नवीनीकरण फीस भी पंजीकरण फीस के बराबर 12000 रुपए तय की गई है। होटल के पंजीकरण के लिए सरकार की ओर से नगर निगम और शहरी विकास विभाग की रिपोर्ट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना/संचालन की सहमति और ड्राइंग में बाथरूम, शौचालय पार्किंग, किचन, डायनिंग एरिया, वर्षा जल संचयन प्रणाली और सौर प्रणाली की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
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होमस्टे एसोसिएशन गुस्से में
हिमाचल प्रदेश होमस्टे एसोसिएशन ने सुक्खू सरकार के मनमाने नियमों का यह कहते हुए विरोध किया है कि होटल और होमस्टे के रजिस्ट्रेशन फीस में 12 गुने का अंतर मनमाना है और इसका जमकर विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि जल्द ही इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराकर सरकार को रजिस्ट्रेशन फीस को युक्तिसंगत बनाने की मांग की जाएगी।
