शिमला। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार रात से लगातार तेज बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने सोमवार शाम 6 बजे तक हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
शिमला में मौसम खराब
शिमला शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश के साथ घनी धुंध का असर भी देखने को मिल रहा है। खासकर ढली से फागू के बीच घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी 20 मीटर से भी नीचे गिर गई है, जिससे सड़क मार्ग पर चलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। जिला प्रशासन ने वाहन चालकों और आम लोगों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : एंबुलेंस को पति ने किया ओवरटेक, बाइक पर पीछे बैठी पत्नी गिरी- थम गई सांसें
मनाली में स्कूल और आईटीआई बंद
कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र में बारिश का असर सबसे अधिक देखा जा रहा है। बीती रात से हो रही मूसलधार बारिश के कारण कई ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। स्थिति को देखते हुए SDM मनाली ने सोमवार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों तथा आईटीआई में छुट्टी घोषित कर दी है। प्रशासन ने यह फैसला बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है।
ब्यास नदी में बढ़ा जलस्तर
मनाली में लगातार हो रही बारिश के कारण ब्यास नदी का जल स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने आज के लिए पांच जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू और सिरमौर जिला में भारी बारिश हो सकती है। लगातार हो रही बारिश से कई क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
यह भी पढ़ें : विक्रमादित्य बोले: समय रहते मिलेगी आपदा चेतावनी, हिमाचल में लागू करेंगे जापान-कोरिया की तकनीक
आज से अगले दो दिन कठिन
मौसम विभाग के अनुसार, 6 अगस्त को राज्य भर में येलो अलर्ट रहेगा, जबकि 7 अगस्त से किसी भी प्रकार का मौसम अलर्ट प्रभावी नहीं रहेगा। बीते कुछ दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से भारी वर्षा दर्ज की गई है। रविवार को जहां ऊना जिले में बारिश नहीं हुई, वहीं शिमला, धर्मशाला, मंडी, चंबा और अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।
भारी बारिश से सड़कें बंद
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के कारण प्रदेश में 1 राष्ट्रीय राजमार्ग ;एनएच.505द्ध बंद हो गया हैए जबकि कुल 296 संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं। अकेले मंडी में 164, कुल्लू में 67, कांगड़ा में 25 और चंबा में 21 सड़कें बंद हैं। इसके अतिरिक्त 134 बिजली ट्रांसफार्मर और 266 पेयजल योजनाएं ठप्प पड़ी हैं, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : खतरे के साए में पढ़ रहे बच्चे, कभी भी गिर सकता है स्कूल- नहीं दिया जा रहा ध्यान
दर्जनों की मौत, सैकड़ों घायल
20 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में राज्य को भारी जनहानि का सामना करना पड़ा है। अब तक 184 लोगों की मौत, 292 घायल और 36 लोग लापता हो चुके हैं। सबसे ज्यादा मौतें मंडी (37), कांगड़ा (30), कुल्लू (18), चम्बा (17) और शिमला (17) में हुई हैं। राज्य में इस दौरान 28 बादल फटने, 53 फ्लैश फ्लड और 47 भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित
मंडी जिला इस मानसून में सबसे अधिक प्रभावित रहा है, जहां 1089 घरों को नुकसान हुआ और 391 घर पूरी तरह से ढह गए हैं। वहीं अकेले मंडी में 16 बादल फटने, 12 भूस्खलन और 11 फ्लैश फ्लड की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कुल मिलाकर राज्यभर में 1649 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 457 पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
यह भी पढ़ें : BREAKING: हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित, यहां देखें
1700 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान
अब तक राज्य को मानसून से 1714 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसमें सबसे अधिक लोक निर्माण विभाग (PWD) को 888 करोड़ और जल शक्ति विभाग को 580 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसके अलावा लगभग 1483 पशुशालाएं भी प्रभावित हुई हैं और 1536 पशुओं के साथ-साथ 21,520 पोल्ट्री पक्षियों की भी मौत हुई है।
सरकार की अपील, सतर्क रहें
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अलर्ट के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में। जिला प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है और बंद सड़कों को खोलने तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
