मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में आसमानी आफत ने एक बार फिर कहर बरपाया। भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन ने एक ही परिवार की खुशियां छीन लीं। सुंदरनगर उपमंडल की निहरी तहसील के बोई पंचायत के बरागटा गांव में तड़के सुबह हुए भूस्खलन में एक मकान मलबे में दब गया, जिसमें एक ही परिवार के पांच सदस्य दब गए। यह हादसा इतना भयानक था कि मलबे के नीचे दबी एक मां, उसकी गोद में लिपटा आठ महीने का मासूम और वृद्ध दादी की मौके पर ही मौत हो गई।

सुबह की पहली किरण मौत लेकर आई

गांव अभी नींद से जागा भी नहीं था कि तेज बारिश के साथ पहाड़ी दरकने की भयावह आवाज़ ने सबको चौंका दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, बरागटा गांव में कमला देवी का घर ज़मीन में समा चुका था। जिस वक्त यह हादसा हुआ, पूरा परिवार गहरी नींद में था। घर के चारों तरफ से आया मलबा सब कुछ निगल गया। घर गिरने से पूरा परिवार मलबे में दफन हो गया।

मां की गोद में अंतिम सांस लेता भीम

सबसे ज्यादा झकझोर देने वाला दृश्य तब सामने आया जब राहत कार्य के दौरान मलबे से आठ महीने के बच्चे भीम का शव निकाला गया। वह अपनी 34 वर्षीय मां कमला देवी से लिपटा हुआ था, जैसे आखिरी पल तक उसने मां से जुदा होने से इंकार कर दिया हो। पास ही 64 वर्षीय टांगों देवी, जो बच्चे की दादी थीं, मृत अवस्था में मिलीं।

गांव वालों ने खुद संभाली जिम्मेदारी

भारी बारिश और रास्ते अवरुद्ध होने के कारण प्रशासनिक मशीनरी समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकी। लेकिन गांव वालों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए बेलचों और फावड़ों से खुद ही राहत कार्य शुरू कर दिया। जान हथेली पर रखकर उन्होंने मलबे में फंसे दो अन्य परिजनों को जीवित बाहर निकाला।

 

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प्रशासन की मुस्तैदी, पर कुदरत से हार

घटना की सूचना मिलते ही मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन स्वयं मौके के लिए रवाना हुए। मार्ग में कई जगह लैंडस्लाइड होने के बावजूद वे पैदल ही कीचड़ और मलबे को पार करते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर मौजूद एसडीएम अमर नेगी ने बताया कि राहत कार्यों में तेजी लाई गई है और प्रभावित परिवार को प्रशासन की ओर से तुरंत सहायता राशि प्रदान की गई है।

 

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बरसात बना अभिशाप

हिमाचल में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए जीवनदायिनी नहीं, बल्कि विनाशकारी बनती जा रही है। बरसात के कारण पहाड़ दरक रहे हैं, रास्ते बंद हो रहे हैं और लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं रहे। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बता दिया कि हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

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पीड़ितों के लिए प्रदेश भर में शोक

बरागटा गांव की इस त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। गांव में मातम पसरा हुआ हैए हर आंख नम है। लोगों का कहना है कि कमला देवी और उनका परिवार बहुत ही मेहनती और मिलनसार था। उनके यूं अचानक चले जाने से गांव की एक जिंदादिल इकाई बिखर गई है।

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