मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में 30 जून की रात को आई प्राकृतिक आपदा में अपने पूरे परिवार को खो चुकी 11 माह की बच्ची निकिता अब पूरे प्रदेश की बेटी बन रही है। इस बच्ची को गोद लेने के लिए अब तक 150 से अधिक लोगों ने जिला प्रशासन और परिवार से संपर्क किया है। हर कोई इस बच्ची को गोद लेने की इच्छा जता चुका है। फिलहाल यह बच्ची अपनी बुआ के पास है।
बाढ़ में बह गए थे माता पिता और दादी
बता दें कि मंडी जिला में 30 जून को भारी बारिश के बाद कई जगह बादल फटे थे। जिससे भारी नुकसान हुआ था। ऐसा ही बादल सराज उमंडल के परवाड़ा गांव में भी फटा था। जिससे घरों में भारी तबाही हुई थी। 11 माह की बच्ची निकिता के माता पिता और दादी भी घर की और आ रहे बाढ़ के बहाव को दूसरी तरफ करने का प्रयास करने के लिए बाहर गए थे, लेकिन तीनों बाढ़ की चपेट में आ गए और बह गए।
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घर में अकेली मिली थी 11 माह की बच्ची
अगली सुबह पहली जुलाई को जब बचाव दल मौके पर पहुंचा तो उन्हें बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी थी। जिसमें 11 माह की निकिता एक चमत्कारिक रूप से इस प्राकृतिक आपदा में बच निकली। नितिका के पिता का शव मलबे से बरामद कर लिया गया है, जबकि उसकी मां और दादी अब भी लापता हैं। लेकिन इस दिल दहला देने वाली त्रासदी के बीच, नितिका की बची हुई सांसें आज लाखों दिलों में उम्मीद और ममता की लौ जगा रही हैं।
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एसडीएम के साथ बच्ची की फोटो हुई थी वायरल
घटना के तुरंत बाद गोहर की एसडीएम स्मृतिका नेगी जब मौके पर पहुंचीं, तो मलबे और तबाही के बीच उन्हें जो मिला, वह सिर्फ एक बच्ची नहीं, बल्कि हिमाचल की उम्मीद थी। एसडीएम स्मृतिका नेगी ने इस बच्ची को अपनी गोद में उठाए रखा, जिसकी फोटो और वीडियो जमकर वायरल हुई। नेगी ने कहा था कि ये कोई आम बच्ची नहीं, यह एक सुपरगर्ल है। जिसने मौत को मात दी है और हम सबकी ज़िम्मेदारी बन गई है।
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गोद लेने के लिए 150 से अधिक आवेदन
नितिका की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही देशभर से न केवल आर्थिक मदद बल्कि उसे गोद लेने की इच्छाएं भी जताई गईं। अब तक 150 से ज्यादा लोग और परिवार गोद लेने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। विदेशों से भी कॉल आ रहे हैं, जहां लोग इस बच्ची को एक नया जीवन देने की बात कर रहे हैं।
प्रशासन ने दो बैंक खाते खोल
जिला प्रशासन ने तुरंत नितिका के नाम पर दो बैंक खाते खोले हैं। इन खातों में देशभर से लोग दिल खोलकर आर्थिक मदद भेज रहे हैं। प्रशासन ने ऐलान किया है कि इस धनराशि से नितिका के नाम पर एक फिक्स्ड डिपॉजिट तैयार की जाएगी, जो वह 18 साल की उम्र में उपयोग कर सकेगी। यह उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को संवारने में काम आएगी।
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उम्मीद की बच्ची, बन गई पूरे प्रदेश की पहचान
नितिका को अब "उम्मीद की बच्ची" के नाम से जाना जाने लगा है। वह एक जीवित प्रतीक बन गई है कि कैसे त्रासदी के बीच भी जीवन पनप सकता है। उसके मुस्कुराते चेहरे में लाखों लोग अब एक नई सुबह की किरण देख रहे हैं।
