कुल्लू। 14 मार्च को पूरे भारतवर्ष में खेली जाने वाली होली की शुरुआत हिमाचल प्रदेश में आज से हो चुकी है। प्रदेश के जिला कुल्लू में आज छोटी होली का उत्सव मनाया जा रहा है, और इसके लिए यहां के हाट बाजार रंग-बिरंगे सामान से सजे हुए हैं। जिले में 12 और 13 मार्च को होली मनाई जाएगी, जबकि देशभर में 14 मार्च को मुख्य होली उत्सव होगा। कुल्लू में एक दिन पहले ही होली का आनंद लिया जाएगा और इस मौके पर रघुनाथ मंदिर में विशेष पूजा और होली का आयोजन किया गया।

रघुनाथ मंदिर में हुई छोटी होली की शुरुआत

बताते चलें कि इस छोटी होली के शुभारंभ पर रघुनाथ मंदिर में रंगों की मस्ती और भक्ति का संगम देखा गया। इस दौरान भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी मौजूद रहे और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही शहर में रंगों और खुशी का माहौल था और लोग विभिन्न टोलियों में घूमते हुए एक-दूसरे को मुबारकबाद देते दिखाई दिए।

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बैरागी समुदाय की विशेष होली परंपरा

कुल्लू में बैरागी समुदाय की होली विशेष मानी जाती है, जो प्राचीन परंपरा के अनुसार बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। होली उत्सव का आगाज 40 दिन पहले से ही माना जाता है, लेकिन होलाष्टक आठ दिन पहले से शुरू हो जाता है। 

 रघुनाथ के चरणों में हर रोज चढ़ता है गुलाल

इस दौरान बैरागी समुदाय के लोग भगवान रघुनाथ के चरणों में हर रोज गुलाल चढ़ाते हैं और ब्रज के पारंपरिक होली गीत गाते हुए शहर भर में टोलियों में घूमते हैं। पिछले 400 वर्षों से इस परंपरा को निभाया जा रहा है, जो कुल्लू की होली को और भी खास बनाता है।

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कुल्लू में रंगों की बहार

12 मार्च से ही जिले के लोग अपनी-अपनी टोलियों में शहरभर में घूमने लगे हैं और एक-दूसरे पर रंगों की बरसात कर रहे हैं। ढोल और ढोलक की थाप पर लोग खुशी से नाचते हुए गली-गली जाकर होली के रंग में रंगे हुए दिखाई दे रहे हैं। कुल्लू में होली का यह उत्सव न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यहां की रंगीन और जीवंत परंपराओं का भी हिस्सा है।

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