शिमला। हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक कर्मचारी की नौकरी के 12 साल के दौरान 11 बार ट्रांसफर होने का मामला अदालत पहुंचा तो कोर्ट ने हालिया तबादला आदेश पर तत्काल रोक लगा दी।
12 साल की नौकरी में 11 तबादले
खास बात यह है कि कर्मचारी को मौजूदा तैनाती पर आए अभी सिर्फ दो महीने ही हुए थे। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार से इस कर्मचारी और संबंधित कर्मचारी के तबादले से जुड़ा पूरा मूल रिकॉर्ड तलब किया है।
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दो महीने बाद ही फिर ट्रांसफर का आदेश
सन्नी शर्मा की ओर से दायर याचिका में अदालत को बताया गया कि उनकी मौजूदा पोस्टिंग को अभी महज दो महीने हुए थे। इसी बीच उनका दोबारा तबादला कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि अभी उन्हें मौजूदा पद से रिलीव नहीं किया गया है और न ही उन्होंने अपना चार्ज किसी दूसरे कर्मचारी को सौंपा है। वहीं, जिस कर्मचारी को उनके स्थान पर भेजा गया है, उसने भी अभी तक वहां ज्वाइन नहीं किया है।
सराकर से मांगा पूरा रिकॉर्ड
मामले में सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि याचिकाकर्ता की करीब 12 साल की सेवा अवधि में यह 11वां तबादला है। इतनी कम अवधि में बार-बार स्थानांतरण के तथ्य पर अदालत ने संज्ञान लिया और सरकार से पूरे मामले का रिकॉर्ड मांगा।
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ट्रांसफर नोटिफिकेशन पर लगाई रोक
अदालत ने फिलहाल हालिया ट्रांसफर नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार जब तक मौजूदा कर्मचारी की रिलीविंग और नए कर्मचारी की ज्वाइनिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इस तबादला आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी। राज्य सरकार को मामले में नोटिस जारी किया गया है। अब अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। सरकार को तबादले से संबंधित मूल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करना होगा।
आदेश की अनदेखी पर स्कूल प्रधानाचार्य को नोटिस
इसी बीच हिमाचल में हाईकोर्ट के आदेशों के पालन से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। मंडी जिले के चच्योट स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य को शिक्षा निदेशालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
मामला गणित प्रवक्ता रेखा कुमारी के लंबित एरियर भुगतान से जुड़ा है। शिक्षिका ने अपने बकाया वित्तीय लाभ को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन को तय समय में एरियर जारी करने और अदालत के आदेश की अनुपालना की जानकारी देने के निर्देश दिए थे।
लंबित एरयिर भी नहीं मिला
शिक्षा निदेशालय की ओर से 14 सितंबर को प्रधानाचार्य को निर्देश दिए गए थे कि 15 सितंबर शाम पांच बजे तक संबंधित शिक्षिका का लंबित एरियर जारी किया जाए। साथ ही 16 सितंबर को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहकर भुगतान में हुई देरी का कारण बताने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद शिक्षा निदेशालय ने प्रधानाचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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नहीं किया कोर्ट के निर्देशों का पालन
नोटिस में उन्हें शुक्रवार सुबह 10 बजे शिक्षा निदेशक के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया है। प्रधानाचार्य को यह भी बताना होगा कि विभागीय और न्यायालय के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
