शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी अधिकारी को भारी पड़ सकती है। इस बार अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेने और एक सेवानिवृत्त अधिकारी को पदोन्नति का लाभ देने में कथित लापरवाही पर ऐसा कड़ा रुख अपनाया कि अफसरशाही वर्ग में भी हलचल मच गई। सबसे अहम बात यह रही कि कोर्ट ने जलशक्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव के सेवानिवृत्ति वाले दिन ही उनके वित्तीय लाभों पर रोक लगाने के सख्त आदेश जारी कर दिए।
हाईकोर्ट का सख्त संदेश, आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों का पालन न करना और निष्पादन याचिका लंबित रहने के बावजूद वरिष्ठता सूची में बदलाव कर कर्मचारी को पदोन्नति के लाभ से वंचित रखना अत्यंत गंभीर मामला है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस के हत्थे चढ़ा 22 वर्षीय विजय, 6 करोड़ का चिट्टा बरामद; 2026 की सबसे बड़ी खेप
रिटायरमेंट के दिन वित्तीय लाभों पर लगी रोक
मामले की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह रही कि अदालत ने जलशक्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव महीपाल वर्मा के सेवानिवृत्ति के दिन ही उनके सेवानिवृत्ति संबंधी वित्तीय लाभों को रोकने का आदेश दे दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक याचिकाकर्ता को मिलने वाली पूरी देय राशि का भुगतान कर उसका डिमांड ड्राफ्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक अतिरिक्त सचिव के वित्तीय लाभ जारी नहीं किए जाएंगे।
सेवानिवृत्त अभियंता को नहीं मिला पदोन्नति का लाभ
यह मामला जलशक्ति विभाग के सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता (तत्कालीन एक्सईएन) भूषण लाल शर्मा से जुड़ा है। उनका आरोप था कि विभाग ने वरिष्ठता सूची में बदलाव कर उन्हें अधीक्षण अभियंता (सिविल) के पद पर मिलने वाली पदोन्नति और उससे जुड़े वित्तीय लाभों से वंचित कर दिया। अदालत ने पाया कि विभागीय कार्रवाई के कारण याचिकाकर्ता को वह लाभ नहीं मिला, जिसके वे न्यायालय के आदेशों के अनुसार हकदार थे।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : जेठ ने रिश्तों को किया शर्मसार- भाई की पत्नी से की गंदी हरकत, थाने पहुंची महिला
2022 के आदेश के बावजूद नहीं हुआ पालन
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि 29 मार्च 2022 को दिए गए फैसले में याचिकाकर्ता को वरिष्ठता सहित सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद दो वर्ष से अधिक समय तक विभाग ने अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया। इस देरी को अदालत ने गंभीरता से लिया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
वरिष्ठता सूची में बदलाव पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि 18 मार्च 2025 को जारी अंतिम वरिष्ठता सूची में याचिकाकर्ता की पदोन्नति तिथि में बदलाव कर दिया गया। पहले जहां उनकी पदोन्नति तिथि 28 दिसंबर 2015 थी, उसे बदलकर 27 जून 2016 कर दिया गया। इस बदलाव के कारण वे अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति पाने से वंचित रह गए और 28 फरवरी 2025 को बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : बाइक से नशे की खेप लेकर जा रहे थे दो यार, हेलमेट में छिपाया था चिट्टा- हुए अरेस्ट
राज्य सरकार को दिए स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को 7 मार्च 2024 से 28 फरवरी 2025 तक अधीक्षण अभियंता (सिविल) के पद के सभी वित्तीय लाभों की गणना कर उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान होने के बाद ही संबंधित अधिकारी के वित्तीय लाभ जारी किए जा सकेंगे।
यह भी पढ़ें- हिमाचल लोक निर्माण विभाग के JE की मौ**त, PGI में दो महीने तक लड़ी जिंदगी की जंग
14 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग अदालत के निर्देशों का पालन कितनी जल्दी करता है। हाईकोर्ट का यह फैसला उन सभी अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी या उनमें देरी करने पर व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
