शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्टाफ नर्स के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और सेवा रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि के बीच सामने आए अंतर को गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि अगर कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि सही मानी जाए- तो संबंधित महिला ने महज 12 वर्ष की उम्र में 10वीं की परीक्षा कैसे उत्तीर्ण कर ली।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता विजय लक्ष्मी भार्गव को इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता को अपनी जन्मतिथि और शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़ी स्थिति को स्पष्ट करना होगा।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : कलयुगी माता-पिता की करतूत, चंद पैसों के लिए बेच दिया बेटा.... 16 साल है उम्र
क्या है पूरा मामला?
मामले में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता के 10वीं कक्षा के प्रमाणपत्र में परीक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष मार्च 1981 दर्ज है। वहीं, याचिकाकर्ता के अनुरोध पर उनके सरकारी सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलकर 1 जून, 1968 दर्ज की गई थी।
उम्र की जानकारी अलग-अलग
इन दोनों दस्तावेजों को एक साथ देखने पर उम्र को लेकर सवाल खड़ा हो गया। अगर 1968 की जन्मतिथि को सही माना जाए तो मार्च 1981 में 10वीं की परीक्षा देने के समय उनकी उम्र करीब 12 वर्ष बनती है। इसी विसंगति पर हाई कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
यह भी पढ़ें-रक्षाबंधन से पहले हिमाचल में हड़कंप- मिठाई की दुकान पर छापा, गुलाब जामुन की चाशनी में मिले कॉकरोच
अदालत ने पूछा सवाल...
सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद इस अंतर को लेकर हैरानी जताई। कोर्ट के सामने यह सवाल था कि सामान्य शैक्षणिक क्रम को देखते हुए 12 वर्ष की आयु में 10वीं की परीक्षा पास करने की स्थिति कैसे बनी।
इतनी कम उम्र में 10वीं कैसे पास की?
अदालत ने याचिकाकर्ता को केवल जन्मतिथि संबंधी जवाब देने तक सीमित नहीं रखा है। उन्हें स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति के लिए जिन आगे की शैक्षणिक और तकनीकी योग्यताओं का इस्तेमाल किया गया, उनके मूल प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करने होंगे।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में गाड़ी मोड़ने को लेकर बवाल: स्थानीय युवकों पर पंजाबियों ने चलाई तल*वारें- 2 की...
मूल दस्तावेज पेश करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता से संबंधित शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता के मूल प्रमाणपत्र पेश करने को कहा है। इससे अदालत को यह जांचने में मदद मिलेगी कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि और अन्य विवरण आपस में किस तरह मेल खाते हैं। इस मामले में अब याचिकाकर्ता को शपथपत्र के माध्यम से जन्मतिथि में हुए बदलाव और 10वीं के प्रमाणपत्र में दर्ज विवरण के बीच अंतर की वजह बतानी होगी।
कब होगी अगली सुनवाई?
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की है। अब अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता का जवाब और उनके मूल शैक्षणिक एवं तकनीकी प्रमाणपत्र रखे जाएंगे। इसके बाद रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को लेकर अदालत आगे का निर्णय लेगी।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : पति का पैर क.टा तो पत्नी ने मांगा तलाक, साथ ही किया झूठा केस- कोर्ट ने लगाई जमकर फटकार
कोर्ट का फोकस इस सवाल पर...
फिलहाल कोर्ट का मुख्य फोकस जन्मतिथि के संशोधन और 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने की उम्र से जुड़े सवाल पर है। मामले में आगे की स्थिति याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र और पेश किए जाने वाले मूल दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होगी।
