#विविध
August 26, 2026
40 हजार KM पैदल चल मणिमहेश पहुंचा श्रद्धालु, पिछले 2 सालों से लगातार जारी है सफर
राजू तुलसी राम मुंबई मेट्रो में सेवाएं दे चुके हैं
शेयर करें:

चंबा। आमतौर पर लोग किसी धार्मिक यात्रा पर कुछ दिनों या हफ्तों के लिए निकलते हैं। मगर मुंबई के राजू तुलसी राम का सफर ऐसा है- जो पिछले करीब दो साल आठ महीने से लगातार जारी है। वह अब तक लगभग 40 हजार किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर चुके हैं।
अपनी इसी अनूठी पदयात्रा के दौरान पवित्र मणिमहेश धाम भरमौर पहुंचे हैं। राजू की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वह रास्ते में लोगों को प्रकृति संरक्षण, बेजुबान जीव-जंतुओं की रक्षा और सनातन संस्कृति का संदेश भी दे रहे हैं।
मुंबई निवासी राजू तुलसी राम पहले मुंबई मेट्रो में सेवाएं दे चुके हैं। नौकरी के दौरान उन्होंने सामान्य जीवन बिताया, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी जिंदगी को एक अलग उद्देश्य के लिए समर्पित करने का फैसला किया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने पैदल यात्रा शुरू की और देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को पर्यावरण और जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का अभियान शुरू किया।
राजू का कहना है कि उनकी पदयात्रा का मकसद केवल अलग-अलग धार्मिक स्थलों तक पहुंचना नहीं है। वह जहां से गुजरते हैं, वहां लोगों को बेजुबान जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील रहने, पेड़-पौधों को बचाने और प्रकृति के संरक्षण के लिए जागरूक करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही वह सनातन संस्कृति के संदेश को भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
राजू की यात्रा की सबसे खास बात इसकी लंबी अवधि और तय की गई दूरी है। करीब दो वर्ष आठ महीने पहले शुरू हुई उनकी पदयात्रा अब तक लगभग 40 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। इस दौरान वह देश के विभिन्न हिस्सों से पैदल गुजर चुके हैं और लोगों से संवाद करते हुए अपने अभियान का संदेश आगे बढ़ा रहे हैं।
इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। मगर राजू का कहना है कि उनके लिए यह सफर किसी एक मंजिल तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। हर दिन की यात्रा के साथ उनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा का संदेश पहुंचाना है।
पवित्र मणिमहेश धाम पहुंचने के बाद राजू की यात्रा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी पर्यावरण की पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा मार्ग पर कूड़ा-कचरा न फेंकने, प्राकृतिक वातावरण को नुकसान न पहुंचाने और बेजुबान जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील रहने का आग्रह किया। उनका संदेश है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि वहां के प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने से भी बनी रहती है।
मुंबई से शुरू हुई राजू तुलसी राम की यह पदयात्रा अब मणिमहेश धाम तक पहुंच चुकी है। मगर उनका उद्देश्य अभी पूरा नहीं हुआ है। करीब 40 हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी वह प्रकृति संरक्षण और जीव-जंतुओं की रक्षा का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए अपनी यात्रा जारी रखना चाहते हैं।
राजू की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किसी उद्देश्य के प्रति मजबूत संकल्प हो तो इंसान हजारों किलोमीटर का सफर भी तय कर सकता है। नौकरी छोड़कर शुरू किया गया उनका यह सफर अब एक व्यक्तिगत यात्रा से आगे बढ़कर प्रकृति, पर्यावरण और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने का अभियान बन चुका है।