#विविध
August 25, 2026
हिमाचल: कैरी बैग के 10 रुपये लेना RED TAPE को पड़ा भारी- ग्राहक पहुंचा कोर्ट, लगा 24 हजार जुर्माना
दो ट्रंक्स और एक जींस-शर्ट की खरीद से शुरू हुआ मामला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के मालरोड पर खरीदारी के बाद कैरी बैग के लिए लिए गए महज 10 रुपये का मामला अब रेड टेप स्टोर को महंगा पड़ गया है। ग्राहकों से बैग के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूलने की शिकायत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तक पहुंची, जहां आयोग ने कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया।
आयोग ने माना कि कंपनी के नाम और लोगो वाले बैग के लिए अलग से पैसा लेना उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार है। तीन अलग-अलग मामलों में स्टोर को 10-10 रुपये वापस करने के साथ कुल 24 हजार रुपये मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के तौर पर देने होंगे।
मामला तीन उपभोक्ताओं की शिकायत से जुड़ा है। मंडी निवासी सुभाष चंद्र और शिमला निवासी अनिल ठाकुर ने 13 अगस्त 2025 को मालरोड स्थित रेड टेप स्टोर से एक-एक रेड टेप ट्रंक्स खरीदे थे। दोनों ने क्रमशः 458 और 431 रुपये का भुगतान किया।
वहीं शिमला निवासी गौरव कुमार ने 14 अप्रैल 2025 को इसी स्टोर से शर्ट और जींस खरीदी थी। सामान की बिलिंग के दौरान स्टोर कर्मचारियों ने तीनों ग्राहकों को कैरी बैग दिया।ग्राहकों ने शुरुआत में इसे सामान रखने के लिए सामान्य बैग समझा, लेकिन बिल देखने पर पता चला कि प्रत्येक से बैग के लिए 10 रुपये अतिरिक्त वसूले गए हैं।
तीनों उपभोक्ताओं ने जब बिल में कैरी बैग के नाम पर जोड़े गए 10 रुपये पर आपत्ति जताई और रकम वापस मांगी तो कर्मचारियों ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। स्टोर की ओर से कहा गया कि बिल में इसकी एंट्री हो चुकी है।
इसके बाद मामला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सामने पहुंचा। आयोग ने शिकायतों पर सुनवाई करते हुए स्टोर की ओर से दिए गए तर्कों और बैग से संबंधित नियमों की जांच की।
सुनवाई के दौरान रेड टेप की ओर से दलील दी गई कि कैरी बैग के लिए शुल्क पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों की कटाई रोकने के उद्देश्य से लिया जाता है। कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहकों के लिए बैग खरीदना अनिवार्य नहीं है।
आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जिस बैग पर कंपनी का नाम, लोगो या विज्ञापन मौजूद हो, उसके लिए ग्राहक से अलग से शुल्क नहीं वसूला जा सकता। आयोग ने यह भी पाया कि रेड टेप के कैरी बैग पर कंपनी का नाम और ‘गो ग्रीन’ का लोगो छपा था।
आयोग ने सेल ऑफ गुड्स एक्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जब कोई ग्राहक सामान खरीदता है तो विक्रेता की जिम्मेदारी है कि खरीदा हुआ सामान उसे उचित तरीके से सौंपे। यदि विक्रेता अपने नाम या ब्रांड का प्रचार करने वाला बैग देता है तो उसका खर्च ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता।
आयोग ने तीनों मामलों में रेड टेप को कैरी बैग के लिए वसूले गए 10-10 रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उपभोक्ताओं को मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी के खर्च के एवज में कुल 24 हजार रुपये देने होंगे।
जिला उपभोक्ता आयोग ने रेड टेप आउटलेट को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया है। यानी मामूली समझे जाने वाले 10 रुपये के कैरी बैग शुल्क की शिकायत आखिरकार कंपनी के लिए हजारों रुपये की देनदारी में बदल गई। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनसे ब्रांड के नाम या लोगो वाले कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है।