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August 26, 2026
हिमाचल : पति का पैर क.टा तो पत्नी ने मांगा तलाक, साथ ही किया झूठा केस- कोर्ट ने लगाई जमकर फटकार
साल 2014 से पति से अलग रह रही पत्नी
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के सुदंरनगर से विवाह और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ा एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है। गंभीर बीमारी के चलते पति का एक पैर कट गया। इसके बाद पत्नी ने उससे तलाक की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मगर अदालत ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी और उस पर लागत भी लगाई।
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुंदरनगर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों और शारीरिक असमर्थता के समय जीवनसाथी को सहारा देने के बजाय उसे बोझ समझकर रिश्ता खत्म करने की कोशिश करना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार नहीं बन सकता।
मामला सुंदरनगर के BBMB क्वार्टर में रहने वाली मीना कुमारी और पारगी निवासी ललित कुमार से जुड़ा है। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) और 13(1)(ib) के तहत तलाक की याचिका दायर की थी।
याचिका में पत्नी ने पति पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता करने के साथ-साथ वर्ष 2014 से उसे छोड़ देने यानी परित्याग करने का आरोप लगाया था। हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान इन आरोपों की स्थिति अलग सामने आई।
अदालत में हुई जिरह के दौरान पत्नी ने स्वीकार किया कि वह और उसका पति वर्ष 2014 से 2023 तक सुंदरनगर के जवाहर पार्क स्थित किराये के मकान में साथ रह रहे थे। ऐसे में वर्ष 2014 से पति द्वारा उसे छोड़ देने का आरोप कोर्ट के सामने टिक नहीं सका।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पति ललित कुमार गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं और बीमारी के कारण उनकी एक टांग काटनी पड़ी। इसके बाद वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि पत्नी ने अदालत में स्वीकार किया कि पति का पैर कटने के बाद वह उनसे मिलने तक नहीं गई।
अदालत ने दोनों पक्षों के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद कहा कि पत्नी अपने पति के खिलाफ लगाए गए क्रूरता और परित्याग के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रही है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिस समय पति को पत्नी के सहयोग और साथ की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस समय पत्नी ने अपने नैतिक और वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय तलाक लेने का प्रयास किया।
कोर्ट ने पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए उस पर लागत भी लगाई। अदालत का यह फैसला सिर्फ एक वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में पति-पत्नी के एक-दूसरे के प्रति दायित्व और जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।