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August 21, 2026

हिमाचल में पहले डायरिया...अब फैल रही एक और गंभीर बीमारी-स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

खेतीबाड़ी से जुड़े लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में बरसात के मौसम के बीच बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर डायरिया के मामलों ने लोगों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई हुई है, वहीं अब कुल्लू जिले के सैंज क्षेत्र में स्क्रब टायफस के मामले सामने आने लगे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

बीते दिन तीन और लोगों में इस बीमारी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से खेतों, घास और झाड़ियों के बीच काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

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स्क्रब टायफस का खतरा

जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार के सैंज क्षेत्र में स्क्रब टायफस के लक्षणों वाले मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज पहुंच रहे हैं। यहां मरीजों की जांच के साथ उनका उपचार भी किया जा रहा है। बीते दिन तीन लोगों के स्क्रब टायफस से संक्रमित पाए जाने के बाद क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

फैल रही गंभीर बीमारी

बरसात के मौसम में नमी और झाड़ियों की बढ़ोतरी के कारण इस बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से उन लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है, जो रोजाना खेतों में काम करते हैं, घास काटने जाते हैं या जंगलों और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में जाते हैं।

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कैसे फैलता है संक्रमण?

सीएचसी सैंज में तैनात डॉ. वरुण ने बताया कि बरसात के मौसम में खेतों, घास और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। स्क्रब टायफस संक्रमित चिगर नामक कीड़े के काटने से फैलता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और खेतीबाड़ी से जुड़े लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

कितने मरीज पहंचे अस्पताल?

सैंज क्षेत्र में स्क्रब टायफस के लक्षणों वाले लोग जांच और उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं। बीते दिन तीन लोगों के संक्रमित पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षेत्र में लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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क्या है सक्रब टाइफस ?

ये बीमारी बैक्टीरिया से होती है जो संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है। ये पिस्सू झाड़ियों, खेतों और घास-फूस में मौजूद चूहों से इंसानों के शरीर में फैलता है। अगर वक्त रहते इलाज ना हो तो ये रोग जानलेवा भी हो सकती है। ये फेफड़ों, किडनी व मस्तिष्क पर असर डाल सकती है। आम लक्षण वाले मरीज पांच से सात दिन में ठीक हो जाते हैं जबकि गंभीर मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ होने में 10 से 15 दिन का समय लग सकता है। बुजुर्ग मरीजों में रिकवरी का समय और ज्यादा होता है।

 

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क्या हैं इसके लक्षण ?

  • 105 डिग्री तक तेज बुखार
  • जोड़ों में दर्द
  • कंपकंपी के साथ बुखार
  • शरीर में अकड़न
  • शरीर का टूटा हुआ लगना
  • गर्दन, बगल और कूल्हों के ऊपर गांठें
  • पिस्सू के काटने से त्वचा पर जलन जैसा काला निशान 

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क्या हैं इसके बचाव ?

  • साफ-सफाई का रखें
  • आसपास का वातावरण साफ रखें
  • घर के चारों ओर घास, खरपतवार ना उगने दें
  • कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें 
  • खेतों में काम करते समय टांगे, पांव व बाजू ढककर रखें

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बरसात में होते है ज्यादा मरीज

जुलाई-अगस्त महीने में सबसे ज्यादा मरीज स्क्रब टाइफस के आते हैं. बरसात होने के कारण घास ज्यादा उगती है, ऐसे में स्क्रब टाइफस का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर कोई भी बुखार का मरीज हो और उसके शरीर पर लाल दाने हो तो तुरंत उसका स्क्रब टाइफस का टेस्ट करवाना चाहिए ताकि समय से बीमारी का पता लगाया जा सके।

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