शिमला। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में इलाज करवाने वालों से 10 रुपए की पर्ची काटने को जायज ठहराया है।
उनका कहना है कि रोगी कल्याण समिति ने सभी मरीजों से 10 रुपए वसूलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे मरीजों की लापरवाहियां कम होंगी और खजाने में पैसा भी आएगा।
पीजीआई की तर्ज पर चलेंगे अस्पताल
सोमवार को राज्य सचिवालय में शांडिल बोले कि चंडीगढ़ पीजीआई में ओपीडी के पैसे लगते हैं। इससे मरीजों को फायदा है और अस्पताल के पास भी पैसा आता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार रोगी कल्याण समिति के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
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रोज 40 हजार की कमाई
हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। अकेले शिमला IGMC में रोजाना ओपीडी में आने वाले मरीज 3 से 4 हजार के करीब हैं। इन सभी से पर्ची के नाम से 10 रुपए लिए जाएं तो रोजाना करीब 40 हजार रुपए की कमाई अकेले ओपीडी से अस्पताल को होगी। शांडिल ने फ्री मेडिकल टेस्ट के लिए शुल्क लिए जाने के प्रस्ताव पर कहा कि सरकार के पास इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि, अगर रोगी कल्याण समिति चाहेगी तो सरकार उस पर भी विचार कर सकती है।
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हिमकेयर, आयुष्मान कार्ड धारकों से छीनी सुविधाएं
आपको बता दें कि पिछले दिनों हिमाचल सरकार ने हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड धारकों से स्पेशल वार्ड के लिए पूरा शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। कर्ज के बोझ में दबे हिमाचल प्रदेश की माली हालत को सुधारने के लिए सरकार की गठित एक समिति ने पिछले दरवाजे से शुल्क उगाही का मंत्र फूंका है। पांच लाख रुपए तक के कैशलेस इलाज के हकदार दोनों तरह के कार्ड धारकों से प्राइवेट वार्ड की सुविधा छीनने को समिति की सिफारिशों का ही असर माना जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के पास प्राइवेट अस्पतालों में दोनों तरह के कार्डधारकों को फ्री इलाज की भरपाई करने का पैसा नहीं है।
