शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब भाषा और गणित जैसे विषयों में कमजोर विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल शुरू होने से पहले 45 मिनट का 'जीरो पीरियड' पढ़ाया जाएगा।
सरकारी स्कूलों में होगी एक्स्ट्रा पढ़ाई
यह व्यवस्था 12 हफ्ते तक चलेगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई की कमी दूर हो सके और उनकी बुनियाद मजबूत बन सके। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ एक्सट्रा क्लास लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य उन विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी सीखने से जुड़ी कमियों को दूर करना है- जिन्हें पढ़ने, लिखने या गणित के सामान्य सवाल हल करने में कठिनाई होती है।
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किन बच्चों की लगेगी एक्स्ट्रा क्लास?
विभाग का मानना है कि अगर शुरुआती स्तर की कमजोरियों को समय रहते दूर कर दिया जाए तो आगे की पढ़ाई बच्चों के लिए काफी आसान हो जाएगी। शिक्षा विभाग ने इस अभियान को छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए लागू करने का फैसला लिया है।
12 हफ्ते तक होंगे जीरो पीरियड
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों की बुनियादी दक्षता कमजोर पाई जाएगी, उन्हें इस विशेष कक्षा में शामिल किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन 12 सप्ताह के दौरान जीरो पीरियड किसी भी स्थिति में रद्द नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं इस समय में न तो परीक्षा आयोजित होगी और न ही कोई अन्य गतिविधि रखी जाएगी।
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स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी
आपको बता दें कि यह अभियान समग्र शिक्षा के लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम 2.0 के दूसरे चरण के तहत चलाया जाएगा। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इन स्कूलों में लागू हुआ सिस्टम
शीतकालीन अवकाश वाले जिलों और स्कूलों में इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। इनमें लाहौल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, चंबा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना के एक्सट्रीम समर क्लोजिंग स्कूल शामिल हैं।
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कई स्कूलों में 17 अगस्त से होगा शुरू
वहीं, ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले अन्य सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था 17 अगस्त से शुरू होगी। पूरे प्रदेश में छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी इसी तिथि से जीरो पीरियड लागू किया जाएगा, क्योंकि उनके लिए तैयार की गई कार्य पुस्तिकाएं पहले स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी।
हफ्ते का टाइम टेबल तय
शिक्षा विभाग ने इस विशेष कार्यक्रम के लिए साप्ताहिक टाइम टेबल भी तय की है। इसके अनुसार सप्ताह में तीन दिन गणित, दो दिन अंग्रेजी और एक दिन हिंदी विषय पर विशेष कक्षाएं आयोजित होंगी। विज्ञान विषय से संबंधित कमियों को नियमित कक्षाओं के दौरान दूर किया जाएगा। विभाग का मानना है कि भाषा और गणित मजबूत होने से अन्य विषयों को समझने में भी विद्यार्थियों को आसानी होगी।
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कैसे होगी कार्यक्रम की निगरानी?
कार्यक्रम की निगरानी भी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। प्रत्येक विद्यार्थी की वर्कबुक पर दिए गए QR कोड के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षकों को कार्यक्रम के संचालन के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कमजोर बच्चों का बढ़ेगा आत्मविश्वास
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से कमजोर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही उनकी सीखने की क्षमता में सुधार होगा और भविष्य में बोर्ड परीक्षाओं समेत अन्य कक्षाओं में उनका प्रदर्शन भी बेहतर होगा। विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी विद्यार्थी केवल बुनियादी कमजोरियों की वजह से पढ़ाई में पीछे न रह जाए।
