धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में 16वें वित्त आयोग के लागू होने के साथ ही पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। नए प्रावधान के तहत अब पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि को पहले की तरह 60:40 के अनुपात में नहीं, बल्कि 50:50 के अनुपात में टाइड और अनटाइड मदों पर खर्च किया जाएगा।
पंचायतों को मिलेगा अधिक वित्तीय संतुलन
दरअसल, इस बदलाव से ग्राम पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने और विकास कार्यों में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। अब तक वित्त आयोग से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा टाइड मदों में खर्च करना अनिवार्य था, जबकि अनटाइड फंड का दायरा सीमित रहता था।
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नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों मदों के लिए बराबर-बराबर राशि उपलब्ध होगी। इससे पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों की बेहतर योजना तैयार कर सकेंगी।
यह होता है टाइड और अनटाइड फंड
टाइड फंड का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों पर ही किया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से पेयजल व्यवस्था को मजबूत करना, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, जल पुनर्चक्रण, स्वच्छता अभियान, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, सामुदायिक शौचालयों का निर्माण तथा नालियों और सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे कार्य शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य गांवों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं को मजबूत करना और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना है।
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अनटाइड फंड पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार खर्च करने की सुविधा देता है। ग्राम पंचायतें प्रस्ताव पारित कर इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, गलियों और नालियों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट लगाने, पंचायत भवनों के रखरखाव, पार्क विकसित करने, श्मशान घाट और कब्रिस्तान जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण एवं सुधार पर कर सकेंगी। हालांकि इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के वेतन या अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकेगा।
विकास योजनाओं में आएगी तेजी
विशेषज्ञों का मानना है कि नए वित्तीय ढांचे से पंचायतों को अधिक लचीलापन मिलेगा। स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय कर विकास कार्यों को समय पर पूरा करना आसान होगा। इससे गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ गई है।
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कांगड़ा जिला पंचायत अधिकारी ने बताया कि, प्रदेश में 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी पंचायतों में नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत टाइड और अनटाइड दोनों मदों पर समान अनुपात में राशि खर्च होगी, जिससे ग्रामीण विकास की योजनाओं को संतुलित गति मिल सकेगी।
