शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। शिक्षा विभाग में एक शिक्षक के तबादले के मामले पर सुनवाई करते हुए हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि तबादला करना सरकार का विशेषाधिकार है, लेकिन इसके बावजूद इसे विभागीय नीति और नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
एक शिक्षक ने दी थी अदालत में चुनौती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला शिक्षक प्यार चंद से जुड़ा है, जिनका तबादला शिक्षा विभाग द्वारा चंबा जिले के मिडिल स्कूल रजिंडू में किया गया था। प्यार चंद ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी थी।
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उनका तर्क था कि उन्होंने पहले ही एक हार्ड एरिया के हाई स्कूल जुम्हार में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है। तबादला नीति के अनुसार उन्हें अब हार्ड एरिया से किसी सामान्य क्षेत्र में ट्रांसफर का अधिकार होना चाहिए।
कोर्ट ने सरकार को कहा दो टूक
प्यार चंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ ने शिक्षा निदेशालय द्वारा 4 जुलाई को दिए गए आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि निदेशक द्वारा दिया गया उत्तर हाईकोर्ट के पहले दिए गए 16 मई के आदेश के विरुद्ध है और तबादला नीति की भावना के अनुरूप नहीं है।
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न्यायालय ने दो टूक कहा कि सरकार चाहे तो प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर किसी का तबादला कर सकती है, लेकिन इस दौरान उसकी अपनी तबादला नीति की अनदेखी नहीं की जा सकती।
अदालत ने यह भी कहा
अदालत ने यह भी कहा कि, किसी कर्मचारी को सुविधा अथवा विशेष परिस्थिति में तबादला नीति के अंतर्गत जो छूट मिलती है, उसे भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि कर्मचारियों के साथ किसी भी तरह का प्रशासनिक निर्णय नीतिगत पारदर्शिता और न्यायिक संतुलन के साथ लिया जाना चाहिए।
