शिमला। भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्रोन उड़ानों पर कड़ा प्रतिबंध लागू किया है। केंद्र सरकार ने यह कदम सीमान्त क्षेत्रों में सीमा पार से खतरे के मद्देनजर उठाया है। मंत्रालय निदेशक द्वारा जारी आदेशों में यह साफ किया गया है कि यह निर्णय मौजूदा सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
यहां नहीं मिलेगी ड्रोन उड़ाने की इजाजत
केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में संबंधित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित किया है कि जब तक विशेष अनुमति प्राप्त न हो, तब तक किसी भी नागरिक को इन क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होगी।
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यह आदेश विशेष रूप से उन राज्यों और क्षेत्रों पर लागू होगा जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित हैं और जहां ड्रोन के माध्यम से घुसपैठ या अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है।
रोका जाएगा ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग
यह प्रतिबंध सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सख्त और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। ड्रोन गतिविधियों पर अंकुश लगाने से न केवल जमीनी खुफिया संचालन को सहायता मिलेगी, बल्कि आसमान से हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर भी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्रोन तकनीक के दुरुपयोग को हर हाल में रोका जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं, जैसे कि सेना, पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आवश्यक ड्रोन संचालन पूर्व अनुमति के तहत जारी रह सकेंगे।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
मंत्रालय के अनुसार, सीमा पार से लगातार बढ़ती ड्रोन गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। इनमें जासूसी, हथियारों या मादक पदार्थों की तस्करी, और आतंकवादी घटनाओं में सहायता जैसे गंभीर खतरे शामिल हैं। हालिया घटनाओं में देखा गया है कि ड्रोन का उपयोग असामाजिक और देश विरोधी तत्वों द्वारा खतरनाक इरादों से किया जा रहा है, जिससे देश की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
