शिमला/पठानकोट। हिमाचल प्रदेश के एंट्री टैक्स को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। पंजाब में कुछ निहंग संगठनों ने विरोध के तौर पर हिमाचल नंबर वाली गाड़ियों को रोककर कथित ‘खालसा टैक्स’ वसूलना शुरू कर दिया है। बॉर्डर क्षेत्रों में इस कदम से यात्रियों और वाहन चालकों में चिंता बढ़ गई है। मामला अब केवल टैक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।

टैक्स वसूली के साथ सड़क जाम करने की भी चेतावनी

जानकारी के अनुसार, निहंग संगठन तरना दल की अगुवाई में पंजाब के कीरतपुर साहिब क्षेत्र में कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार से वाहनों से राशि एकत्रित की जा रही है। संगठन का कहना है कि यह कदम हिमाचल सरकार द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स के विरोध में उठाया गया है।

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निहंग नेताओं के मुताबिक छोटी निजी गाड़ियों से 100 रुपये, हल्के व्यावसायिक वाहनों से 200 रुपये और बड़े वाहनों से 300 से 500 रुपये तक की राशि ली जा रही है। साथ ही संगठन ने सड़क जाम करने की भी चेतावनी दी थी, जिससे क्षेत्र में प्रशासन की चिंता बढ़ गई।

जनकल्याण के कार्यों में इस्तेमाल होगी वसूली राशि

निहंग नेताओं का कहना है कि यह धनराशि किसी निजी उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।

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उनका आरोप है कि हिमाचल सरकार द्वारा लिया जा रहा एंट्री टैक्स आम लोगों और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।

क्या है हिमाचल का एंट्री टैक्स विवाद?

हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर टोल अथवा प्रवेश शुल्क वसूलने की व्यवस्था कई दशकों से लागू है। वर्ष 2025 में सरकार ने इसमें मामूली बढ़ोतरी की थी, लेकिन फरवरी 2026 में नई टोल नीति के तहत कई श्रेणियों के वाहनों पर शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया।

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निजी कारों, टैक्सियों, ट्रैक्टरों और भारी वाहनों पर बढ़ाए गए शुल्क का पंजाब और हरियाणा में व्यापक विरोध हुआ। पर्यटन और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई। बढ़ते विरोध के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हस्तक्षेप से कुछ श्रेणियों में प्रस्तावित बढ़ोतरी वापस ले ली गई, लेकिन एंट्री टैक्स को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

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