शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में रहने वाला एक बुजुर्ग दंपति इन दिनों गहन अकेलेपन से जूझ रहा है। कभी घर का आंगन बेटे की हंसी से भरा रहता था, लेकिन अब वही आंगन तीन साल से सूना है।
विदेशी बाबू बना बेटा
दंपति का बेटा अमेरिका में जाकर बस गया है, शादी कर चुका है और अब न ही घर लौटता है, न ही ढंग से फोन करता है। उम्मीद की हर डोर टूटने लगी तो बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी व्यथा लेकर उपायुक्त कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।
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पैसों की नहीं जरूरत, बेटा वापस बुला दो
मां-बाप का कहना है कि हमें पैसों की जरूरत नहीं, बस हमारे बेटे को वापस बुला दो… हमें उसके साथ की जरूरत है। दंपति में से बुजुर्ग पिता ने बताया कि वे सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं और संजौली में उनका अपना घर है।
फोन भी नहीं करता इकलौता बेटा
पढ़ाई–लिखाई में कोई कमी नहीं छोड़ी, बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाया, उच्च शिक्षा के लिए भेजा और फिर वही बेटा अमेरिका में नौकरी पाकर सेटल हो गया। पहले वह नियमित फोन कर लिया करता था, पर धीरे-धीरे फोन कॉल कम होते गए।
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तीन साल से तरस रहे माता-पिता
अब हालात यह हैं कि तीन साल से बेटा घर नहीं लौटा, फोन भी बहुत कम करता है और शादी के बाद तो रिश्ता और भी दूर होता गया। बुजुर्ग मां ने परामर्श केंद्र में दर्दभरी आवाज में कहा हमें पैसे नहीं चाहिए… जो कमी है वो सिर्फ हमारे बेटे की है। घर में हमारी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उनकी बातें सुनकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो उठे।
परामर्श केंद्र में सुनाई पीड़ा
दंपति ने डीसी कार्यालय के परामर्श कक्ष में डॉक्टरों और अधिकारियों के सामने मन का बोझ हल्का किया। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद समय अधिक है, पर बात करने को कोई नहीं, पुराने दोस्त भी अब कम मिलने आते हैं और बेटा बिल्कुल भी साथ नहीं देता।
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दिनभर करते रहते हैं फोन का इंतजार
मां ने रोते हुए बताया कि कभी-कभी पूरा दिन फोन को ताकते रहते हैं कि शायद बेटे का कॉल आए, लेकिन प्रतीक्षा बस प्रतीक्षा ही रह जाती है। SDM ज्योति राणा ने साझा किया भावुक वीडियो- बच्चे दूर हों, तो भी दिल के करीब होते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो
उपायुक्त कार्यालय में हालात देखने के बाद SDM ज्योति राणा ने इस पूरे मामले का वीडियो अपने सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता कितनी मजबूरी और निराशा में उनके पास पहुंचे थे।
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उन्होंने संदेश दिया कि बच्चे अक्सर नौकरी और व्यस्तता में उलझ जाते हैं। लेकिन सप्ताह में एक बार भी माता-पिता का हाल पूछ लिया जाए, तो उनका मन दुनिया जीत लेता है।रिटायरमेंट के बाद माता-पिता के पास ढेर सारा समय होता है… ऐसे में उन्हें अपने बच्चों के साथ का इंतजार और भी ज्यादा सताता है।
साथ की सबसे ज्यादा कमी
SDM ने बुजुर्गों को सलाह भी दी कि वे पुराने दोस्तों से संपर्क बढ़ाएं, रिश्तेदारों से बातें करें और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लें। अकेले बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेंटर पर अभी भी सबसे बड़ी कमी ‘साथ’ की।
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बेटे के बिना मां-बाप नाखुश
शिमला नगर निगम ने अकेले रहने वाले बुजुर्गों को मानसिक और सामाजिक सहारा देने के उद्देश्य से खलीनी और संजौली में डे-केयर सेंटर खोले हैं। यहाँ बुजुर्ग समय बिता सकते हैं, बातें कर सकते हैं, मनोरंजन गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। लेकिन इस दंपति का कहना है केंद्र ठीक है, पर बेटे की जगह कोई नहीं भर सकता।
लोगों ने जताई सहानुभूति
SDM के वीडियो पर लोगों ने भारी संख्या में प्रतिक्रियाएं दीं। अधिकतर लोगों ने दंपति की व्यथा को “आज के समय का कड़वा सच” बताया। कई लोगों ने लिखा कि विदेश जाने वाले बच्चे माता-पिता से धीरे-धीरे कट जाते हैं, जो बेहद दुखद है।
