चंबा। हिमाचल की पहाड़ियों में दबी एक कहानी, जो सुनने में तो लोककथा लगती है, मगर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज है राजा मूसा वर्मन की। एक ऐसा शासक, जिसकी जान बचाई चूहों ने। हां, आपने सही पढ़ा। और उन्हीं चूहों के कारण उसका नाम पड़ा मूसा वर्मन
चूहों की पहरेदारी में बचा राजवंश
820 ईस्वी के आसपास, चंबा के तत्कालीन राजा लक्ष्मी वर्मन एक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए। उस समय उनका बेटा एक नन्हा राजकुमार दुश्मनों के निशाने पर था। युद्ध की विभीषिका को देखते हुए रानी ने उसे भरमौर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र की एक गुफा में छिपा दिया।
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कुछ दिनों बाद जब रानी उसे देखने लौटी, तो आंखें फटी रह गईं राजकुमार जीवित था और उसके चारों ओर चूहे ऐसे डटे थे मानो प्रहरी हों। रानी ने इसे देवी का चमत्कार माना और बेटे का नाम रखा मूसा वर्मन। संस्कृत में मूषक अर्थात चूहा वहीं से आया यह नाम।
इतिहास भी करता है पुष्टि
जे. हचिनसन और जे. फोगल द्वारा लिखित किताब ‘A History of Chamba State’ में इस घटना का ज़िक्र मौजूद है। मूसा वर्मन न केवल जीवित बचा, बल्कि आगे चलकर चंबा राज्य का पुनर्गठन किया और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे वीरता और नीति के प्रतीक माने गए।
‘मूसा गुफा’ है अब भी मौन गवाह?
जनश्रुतियों के अनुसार, वह गुफा भरमौर क्षेत्र में ही स्थित हो सकती है, जो वर्मन राजाओं की पुरानी राजधानी मानी जाती है। कुछ बुज़ुर्ग अब भी एक प्राचीन गुफा को ‘मूसा गुफा’ या ‘चूहे वाली गुफा’ के नाम से जानते हैं।
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सांस्कृतिक खोज की दरकार
अगर सच में यह गुफा मौजूद है, तो यह न सिर्फ चंबा बल्कि पूरे हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा है। ऐसे में पुरातत्व विभाग, स्थानीय समुदायों और शोधकर्ताओं को इस गुफा और कथा से जुड़े सभी पहलुओं को संकलित कर संरक्षित करना चाहिए।
