शिमला। हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी राज्यों के साथ सालों से लटके पड़े सीमा और जल विवादों के अब जल्द ही सुलझने की उम्मीद जग गई है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में देवभूमि अपने हक के लिए हुंकार भरने को तैयार है। आगामी 24 जून को राजधानी शिमला में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (Northern Zonal Council) की एक बेहद महत्वपूर्ण और महाबैठक होने जा रही है। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश अपने हितों से जुड़े प्रमुख मामलों को मजबूती के साथ उठाने की तैयारी में है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और आला अधिकारी शिरकत करेंगे। इस बैठक से हिमाचल प्रदेश को खासी उम्मीदें हैं, क्योंकि सूबा इस बार बैकफुट पर नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ फ्रंटफुट पर खेलने जा रहा है।
बैठक से पहले सचिव स्तर पर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श प्रस्तावित है, जहां विभिन्न राज्यों से जुड़े मुद्दों का प्रारंभिक खाका तैयार किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अंतिम चर्चा होगी।
4200 करोड़ के बकाये पर हिमाचल की पैनी नजर
बैठक में हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रमुख मुद्दा बीबीएमबी से जुड़ा रहने वाला है। दरअसल भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल की हिस्सेदारी के 4200 करोड़ रुपये बकाया हैं। लंबे समय से लंबित यह मामला हिमाचल के लिए आर्थिक और अधिकारों दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में प्रदेश को उम्मीद है कि केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में इस दिशा में कोई ठोस पहल निकल सकती है।
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सूत्रों के अनुसार हिमाचल इस मुद्दे को शाह के सामने पूरी गंभीरता के साथ उठाएगा और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेगा, ताकि वर्षों से लंबित इस वित्तीय मामले का समाधान निकाला जा सके। राज्य सरकार का साफ मानना है कि संकट के दौर में हिमाचल के हक का यह पैसा प्रदेश के विकास के लिए बेहद जरूरी है और इसमें अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पानी और सीमाओं पर 'आर-पार' की रणनीति
हिमाचल प्रदेश केवल बीबीएमबी के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों के साथ जुड़े विभिन्न सीमा और जल विवादों को भी प्रमुखता से उठाएगा। उत्तर भारत के कई राज्यों के बीच वर्षों से चल रहे ऐसे मामलों के कारण विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ता रहा है।
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सतलुज और जल विवाद: पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहा सतलुज-यमुना लिंक (SYL) विवाद तो गर्म रहेगा ही, लेकिन हिमाचल भी पानी के अपने दावों और जल विद्युत परियोजनाओं के रॉयल्टी अधिकारों को लेकर पूरी मजबूती से पक्ष रखेगा।
अंतरराज्यीय सीमा विवाद: जम्मू-कश्मीर और पंजाब के साथ लगती हिमाचल की सीमाओं पर जो लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है, उसे भी गृह मंत्री के समक्ष टेबल पर रखा जाएगा।
मुख्य बैठक से ठीक पहले सचिव स्तर की स्थायी समिति की बैठक भी होगी, जिसके लिए हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों ने अपना होमवर्क और दस्तावेज पूरी तरह दुरुस्त कर लिए हैं।
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पिछली बार सूरजकुंड, इस बार शिमला में सजेगी बिसात
उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की पिछली बैठक हरियाणा के सूरजकुंड में आयोजित की गई थी। इस बार मेजबानी की कमान खुद हिमाचल प्रदेश के हाथों में है, इसलिए हिमाचल इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता। जहां एक तरफ पंजाब सरकार पानी से जुड़े अपने दावों को लेकर विशेष रणनीति बना रही है, वहीं मेजबान होने के नाते हिमाचल प्रदेश ने पड़ोसी राज्यों को घेरने और केंद्रीय गृह मंत्री के सामने अपनी बात को सबसे ऊपर रखने की चक्रव्यूह रचना तैयार कर ली है।
हिमाचल को समाधान की उम्मीद
प्रदेश सरकार और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। विशेष रूप से बीबीएमबी के बकाये, जल संसाधनों में हिस्सेदारी और अंतरराज्यीय विवादों को लेकर हिमाचल को इस बैठक से काफी उम्मीदें हैं। यदि इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति होती है तो यह प्रदेश के आर्थिक हितों और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
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केंद्र की मध्यस्थता से निकल सकता है रास्ता
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि कई वर्षों से उलझे इन विवादों के समाधान के लिए केंद्र की सक्रिय भूमिका जरूरी है। ऐसे में अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक हिमाचल के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। प्रदेश की नजर अब 24 जून पर टिकी है, जब शिमला में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल अपने अधिकारों और हितों की मजबूत पैरवी करते हुए लंबित मामलों के समाधान की दिशा में नई उम्मीद तलाशेगा।
