कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में बरसात का मौसम शुरू होते ही जंगलों में कई तरह के मशरूम निकल आते हैं। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग इन्हें जंगल से लाकर घरों में सब्जी बनाकर खाते हैं। स्थानीय स्तर पर कई मशरूम को पारंपरिक तौर पर खाद्य माना जाता हैए लेकिन इनकी सही पहचान न होने पर यही शौक जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऐसा ही कुछ हिमाचल के कुल्लू जिला में भी हुआ है। यहां एक परिवार को जंगली मशरूम खाना भारी पड़ गया।

 

मामला कुल्लू जिले की लगघाटी के दुर्गम दोघरी गांव से सामने आया है। यहां जंगल से लाई गई जंगली मशरूम की सब्जी खाना एक ही परिवार के आठ सदस्यों को भारी पड़ गया। सब्जी खाने के कुछ ही समय बाद परिवार के सभी सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई। फूड प्वाइजनिंग के लक्षण सामने आने के बाद आनन-फानन में सभी को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में भी दहशत का माहौल है।

 

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मशरूम की सब्जी खाते ही बिगड़ी हालत

जानकारी के अनुसार परिवार के सदस्य बुधवार को अपने घर के साथ लगते जंगल से मशरूम लेकर आए थे। इसके बाद घर में इसकी सब्जी तैयार की गई। परिवार के 66 वर्षीय डोले राम, 28 वर्षीय मोहन लाल, 26 वर्षीय सुरेंद्र, 25 वर्षीय सविता, 24 वर्षीय भगवंतु और नीलम के अलावा एक वर्षीय माहिरा तथा जाह्नवी ने मशरूम की सब्जी खाई।

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सब्जी खाने के बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। उल्टी, पेट दर्द और फूड प्वाइजनिंग जैसे लक्षण सामने आने पर सभी को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ले जाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने सभी का उपचार शुरू किया।

छह लोगों को मिली छुट्टी, दो मासूमों की हालत गंभीर

अस्पताल में उपचार के बाद छह सदस्यों की हालत में सुधार आया, जिसके बाद उन्हें वीरवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि परिवार के दो छोटे बच्चों की हालत गंभीर बनी रही। एक वर्षीय माहिरा और जाह्नवी की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए IGMC शिमला रेफर कर दिया। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के एमएस डॉ. हीरा लाल ने मामले की पुष्टि की है। बच्चों को शिमला रेफर किए जाने के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

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हर जंगली मशरूम खाने योग्य नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार जंगली मशरूम को केवल देखकर खाने योग्य मान लेना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी की वनस्पतिशास्त्री एवं एथ्नोबाटनिस्ट डॉ. तारा देवी सेन ने बताया कि किसी जंगली मशरूम की पहचान केवल उसके रंग, आकार, गंध या स्वाद से नहीं की जानी चाहिए। मशरूम की सही पहचान के लिए उसकी छतरी, डंठल, संरचना और अन्य वनस्पति संबंधी विशेषताओं का बारीकी से परीक्षण जरूरी है। कई जहरीली प्रजातियां देखने में सामान्य और खाने योग्य मशरूम जैसी दिखाई दे सकती हैं, जिससे आम व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो सकता है।

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विशेषज्ञ की पहचान के बिना न खाएं जंगल से लाया मशरूम

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक किसी मशरूम की वैज्ञानिक पहचान और उसके जहरीलेपन के बारे में पूरी तरह पुष्टि न हो जाए, तब तक उसे विषैला ही मानकर चलना चाहिए। जरूरत पड़ने पर इसकी प्रयोगशाला में जांच करवानी चाहिए। 

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