शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पशुपालन विभाग में पशु मित्र पॉलिसी 2025 (मल्टी टॉस्क वर्कर) की अधिसूचना जारी कर दी है। यानी अब इन हिमाचल के पशुपालन विभाग में पशु मित्रों की भर्ती की जाएगी। पशु मित्र पॉलिसी में इस भर्ती को लेकर सभी शर्तों को जारी किया गया है। पशु पालन विभाग में क्लास फोर के खाली पदों पर इन पशु मित्रों की भर्ती की जाएगी। सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार पशु मित्र बनने वाले युवाओं को हर माह पांच हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।
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हालांकि सुक्खू सरकार की यह पशु मित्र पॉलिसी एक तरह से बेरोजगार युवाओं के साथ भद्दा मजाक है। सरकार इसे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की दिशा में एक कदम बता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। पांच हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर नियुक्त होने वाले पशु मित्रों के सामने अब यह सवाल है कि आखिर इतने कम पैसे में गुजारा कैसे होगा।
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पांच हजार में कैसे चलेगा घर
सरकार की इस पॉलिसी के अनुसार चयनित पशु मित्रों को हर महीने सिर्फ ₹5000 बतौर मानदेय दिया जाएगा। यानी दैनिक मजदूरी के हिसाब से मात्र ₹166 प्रति दिन। वहीं दूसरी ओर मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को भी अब ₹200 से अधिक दिहाड़ी मिलती है। ऐसे में सरकार की यह योजना बेरोजगारों के लिए रोजगार का विकल्प कम, और एक भद्दा मजाक ज्यादा लग रही है।
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क्या है सुक्खू सरकार की पशु मित्र पॉलिसी 2025
क्लास-4 पदों के स्थान पर पशु मित्र
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्तियां क्लास-4 के रिक्त पदों के स्थान पर की जाएंगी। यानी स्थायी रोजगार की जगह अब अस्थायी मानदेय आधारित नियुक्ति की जा रही है। यह युवाओं को स्थायित्व की बजाय अस्थायित्व की ओर धकेलने जैसा है। इसके तहत नियुक्त होने वाले पशु मित्रों से रोजाना 4 घंटे काम लिया जाएगा] लेकिन उन्हें ना तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिलेगा और ना ही भविष्य में नियमित करने का कोई दावा बनता है।
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चयन प्रक्रिया का ढांचा तैयार
इस नीति के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की उम्र 18 से 45 साल के बीच होनी चाहिए और 10वीं पास होना अनिवार्य है। चयन से पहले उन्हें 25 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर की दूरी एक मिनट में तय करनी होगी। फिजिकल टेस्ट पास करने के बाद चयन अकादमिक अंकों और अन्य सामाजिक मानदंडों के आधार पर होगा।
- शैक्षणिक योग्यता: 85 अंक
- पंजीकृत पशु: अधिकतम 4.5 अंक
- स्थानीय पंचायत निवासी: 1 अंक
- SC/ST/OBC: 1 अंक
- विधवा/तलाकशुदा/सिंगल वूमेन: 1.5 अंक
- BPL/ईडब्ल्यूएस: 1.5 अंक
- सिंगल बेटी/अनाथ: 1 अंक
- भूमिहीन या 1 हेक्टेयर से कम जमीन: 2 अंक
- NSS सर्टिफिकेट: 1 अंक
इन तमाम अंकों के आधार पर मेरिट बनाई जाएगी, और उसी के मुताबिक चयन होगा।
सिर्फ नाम की सुविधाएं
पशु मित्रों को रोजाना 4 घंटे काम के बदले महीने में सिर्फ एक छुट्टी मिलेगी। महिलाओं को 180 दिन की मैटरनिटी लीव और मिसकैरेज की स्थिति में 45 दिन का अवकाश दिया जाएगा, लेकिन जब इनका दर्जा ही अस्थायी है, तो ऐसी छुट्टियों का क्या व्यावहारिक लाभ होगा?
बेरोजगारों से खिलवाड़ नहीं तो और क्या?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार ने इस नीति को ग्रामीण पशुपालकों की मदद और पशुधन संवर्धन के लिए बताया है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह नीति स्थायी रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे बेरोजगार युवाओं के साथ एक क्रूर मजाक बनकर सामने आई है।
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राज्य में हजारों शिक्षित बेरोजगार वर्षों से सरकारी नौकरी की आस में हैं, वहीं सरकार उन्हें क्लास-4 के पदों पर भी स्थायी नौकरी न देकर मामूली मानदेय वाली सेवा दे रही है। पांच हजार रुपये में आज के दौर में ना घर चल सकता है, ना परिवार। पेट्रोल, गैस, राशन, बिजली — हर चीज महंगी हो गई है। ऐसे में यह योजना रोजगार सृजन नहीं, शोषण का नया मॉडल बनती दिख रही है।
बेरोजगारों के मन में उठ रहे सवाल
- जब मनरेगा में दिहाड़ी ₹200 से ऊपर है, तो सिर्फ ₹166 प्रतिदिन देना कहां की समझदारी है?
- क्लास-4 की स्थायी नौकरी की जगह अस्थायी पशु मित्र क्यों?
- क्या यह योजना ग्रामीण बेरोजगारों को मजबूरी में सस्ते श्रमिक बना देने का तरीका है?
