शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी अपनी महत्वाकांक्षी योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्बहाली के कार्य भी विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जीरामजी के तहत कराए जाएंगे। सरकार ने योजना के दायरे को बढ़ाने के साथ ही मजदूरी और रोजगार के दिनों में भी बढ़ोतरी की है। नई व्यवस्था एक जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।

अब आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी मिलेगा रोजगार

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्बहाली से जुड़े कार्य इस योजना के तहत कराए जाएंगे। इसके अलावा जल संरक्षण, नालों की सफाई, पहाड़ी ढलानों को सुरक्षित बनाने, क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों की मरम्मत और अन्य आपदा न्यूनीकरण कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है।

 

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दिहाड़ी बढ़ी, रोजगार के दिन भी बढ़े

बता दें कि अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी में भी इजाफा किया है। अब प्रदेश सरकार ने भी अनुसूचित क्षेत्रों में अब 375 रुपये प्रतिदिन और गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में 300 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलेगी। वहीं पात्र परिवारों को पहले की तुलना में अब 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और उन्हें लंबे समय तक रोजगार मिल सकेगा।

 

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सभी जिलों को जारी हुए निर्देश

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों, उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि योजना में किए गए बदलावों से प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास कार्यों को गति मिलेगी और आपदा के समय स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा।

 

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कमेटी की सिफारिश पर हुआ फैसला

सीएम सुक्खू के निर्देश पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने योजना का अध्ययन कर बदलावों की सिफारिश की थी। समिति में पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू और निदेशक राघव शर्मा भी सदस्य थे। सरकार का कहना है कि योजना के पुराने प्रावधान हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण श्रमिकों की जरूरतों के अनुरूप नहीं थे, इसलिए इसमें संशोधन किया गया है।

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