किन्नौर। इन दिनों हिमाचल की पहाड़ियां बर्फ से ढकी हैं, हवाओं में सर्दी है और वादियों में सन्नाटा। लेकिन किन्नौर जिले की तारांडा पंचायत में सर्द मौसम से ज्यादा भारी माहौल था। बर्फबारी के बीच जब असम राइफल्स के शहीद राइफलमैन जय कृष्ण का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। तिरंगे में लिपटे वीर सपूत की एक झलक पाने के लिए सैकड़ों ग्रामीण उमड़ पड़े “शहीद जय कृष्ण अमर रहें के नारों से घाटी गूंज उठी, लेकिन हर आंख नम थी।
बर्फ से ढकी वादियों में निकली अंतिम यात्रा
जैसे ही पार्थिव शरीर गांव तरंडा पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच तिरंगे में लिपटे शहीद की अंतिम यात्रा निकली तो माहौल भावुक हो उठा। गांव की गलियों से लेकर श्मशान घाट तक देशभक्ति और दर्द एक साथ नजर आया।
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पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम सलामी
असम राइफल्स के जवानों ने भारतीय सेना के अधिकारियों के नेतृत्व में शहीद को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। हथियारों की सलामी और राष्ट्रगान के बीच शहीद जय कृष्ण को पंचतत्व में विलीन किया गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद जय कृष्ण, स्वर्गीय ज्ञान सिंह के पुत्र थे। वे अपने पीछे माता फूलना देवी, पत्नी स्वर्णजीता, पुत्र अतुल और भाई बाल कृष्ण को छोड़ गए हैं। बेटे का पार्थिव शरीर देखकर मां बेसुध हो गईं, वहीं पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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2009 में दिखाया था अदम्य साहस
गौरतलब है कि शहीद जय कृष्ण वर्ष 2005 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे। वर्ष 2009 में असम में उग्रवादियों के खिलाफ मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया था, जिसके लिए उन्हें भारतीय सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
इलाज के दौरान हुए वीरगति को प्राप्त
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि शहीद जय कृष्ण पिछले कुछ समय से कोलकाता के कमांड अस्पताल में उपचाराधीन थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। सूचना मिलते ही प्रशासन ने पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव पहुंचाने की व्यवस्था की।
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वीरता को याद करता रहेगा किन्नौर
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जय कृष्ण की शहादत और उनका साहस हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणा बना रहेगा। हिमाचल की बर्फीली धरती ने आज अपने एक और वीर सपूत को नम आंखों से विदाई दी।
