#अपराध
June 15, 2026
हिमाचल मनीषा ह*त्याकांड: 22 और 25 साल के दो युवकों ने मारी थी गो*ली, पुलिस ने हरियाणा से धरे
कार में एचपी का फर्जी नंबर लगाकर पहुंचे थे शिमला, दो पिस्तौल भी बरामद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुए बहुचर्चित मनीषा मित्तल हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए महज करीब 40 घंटे के भीतर हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने हरियाणा से दो कथित शूटरों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों की उम्र 22 और 25 वर्ष बताई जा रही है।
स्कूल संचालिका की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज करते हुए कई टीमों का गठन किया और लगातार छानबीन के बाद आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
शिमला पुलिस की विशेष टीम ने हरियाणा में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झज्जर जिले के दुजाना गांव निवासी 22 वर्षीय आशीष अहलावत और रोहतक क्षेत्र के 25 वर्षीय दीपक के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्हें शिमला लाकर अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस रिमांड की मांग करेगी ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा सके।
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मनीषा मित्तल की हत्या के बाद पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण भौतिक और जैविक साक्ष्य जुटाए। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा डिजिटल साक्ष्यों का भी बारीकी से विश्लेषण किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी एक सफेद रंग की कार में हरियाणा से शिमला पहुंचे थे। पहचान छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए उन्होंने वाहन पर हिमाचल प्रदेश का फर्जी पंजीकरण नंबर लगा रखा था। हालांकि तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने वाहन की वास्तविक पहचान स्थापित कर ली। इसी कड़ी को जोड़ते हुए जांच टीम आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
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पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई दो पिस्तौल भी बरामद कर ली हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने में किया गया था। फोरेंसिक जांच के जरिए हथियारों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा, जिससे मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या की साजिश किसने रची, इसके पीछे कौन लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों को किसने मदद पहुंचाई। जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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मनीषा मित्तल हत्याकांड जैसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले को कम समय में सुलझाने पर शिमला पुलिस की कार्रवाई की सराहना की जा रही है। पुलिस ने तकनीकी जांच, फोरेंसिक साक्ष्य और जमीनी स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर बेहद कम समय में आरोपियों तक पहुंचकर मामले की दिशा बदल दी। अब पूरे मामले की नजर आगामी पूछताछ और पुलिस जांच पर टिकी हुई है, जिससे हत्या के पीछे छिपे असली मकसद और साजिश की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।