बिलासपुर। एक मां ने मजदूरी कर अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाया। उम्मीद थी कि वे नौकरी करेंगी, घर की गरीबी दूर करेंगी और परिवार का सहारा बनेंगी। लेकिन जिन सपनों को पूरा करने के लिए दोनों बेटियां घर से दूर गई थीं, वहीं उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया। गलत संगत और चिट्टे की लत ने एक बेटी की जान ले ली।

चिट्टे ने निगले विधवा मां के सपने

जबकि दूसरी आज भी इलाज और काउंसलिंग के सहारे सामान्य जिंदगी में लौटने की कोशिश कर रही है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की हकीकत है जो रोजगार, पढ़ाई और बेहतर भविष्य की तलाश में घर छोड़ते है- लेकिन कई बार नशे के जाल में फंस जाते हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में इलाज राम भरोसे! बच्चों को थी कान में दर्द, सर्जरी के लिए मिली अगले साल की डेट

पिता की मौत के बाद मां ने अकेले संभाला परिवार

घुमारवीं उपमंडल के एक बेहद गरीब परिवार में पिता के निधन के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद मां ने मजदूरी कर अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाया। उन्होंने दोनों बेटियों को 12वीं तक शिक्षा दिलाई और कंप्यूटर का डिप्लोमा भी करवाया।

नौकरी की तलाश में पहुंचीं चंडीगढ़

मां का सपना था कि बेटियां नौकरी कर परिवार की आर्थिक स्थिति बदलें और गरीबी से बाहर निकालें। करीब पांच साल पहले दोनों बहनें रोजगार की तलाश में चंडीगढ़ चली गईं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा और परिवार को उम्मीद थी कि बेटियों का भविष्य संवर जाएगा। मगर कुछ समय बाद दोनों गलत संगत में पड़ गईं। दोस्तों के साथ केवल आजमाने के लिए शुरू किया गया नशा धीरे-धीरे चिट्टे की लत में बदल गया।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : तेज बारिश के बीच खड्ड में समाई कार, 100 मीटर तक बहती रही- अंदर बैठे थे 2 युवक

व्यवहार बदलने लगा तो परिवार को हुआ शक

कुछ समय बाद परिवार ने बेटियों के व्यवहार में बदलाव महसूस किया। बातचीत कम होने लगी, बार-बार पैसों की मांग होने लगी और उनका स्वभाव भी बदल गया। परिजनों ने उन्हें समझाने और इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन तब तक नशे की लत काफी गहरी हो चुकी थी।

छह महीने पहले उजड़ गया मां का संसार

करीब छह महीने पहले चिट्टे की ओवरडोज के कारण एक बेटी की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।जिस मां ने वर्षों तक मजदूरी कर बेटियों को पढ़ाया था, उसकी सारी उम्मीदें एक पल में टूट गईं। परिवार आज भी उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में चलती बस के अचानक खुले दो टायर, यात्रियों की अटकी सांसे; मची चीख-पुकार

दूसरी बेटी लड़ रही है जिंदगी की जंग

बहन की मौत के बाद दूसरी बेटी घर लौट आई। परिवार आर्थिक तंगी के बावजूद उसका इलाज और काउंसलिंग करवा रहा है। मां दिन-रात उसके साथ रहती है ताकि वह दोबारा किसी गलत संगत में न पड़े। डॉक्टरों की सलाह और परिवार के सहयोग से वह धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी की ओर लौटने की कोशिश कर रही है।

घर से दूरी और गलत संगत बनी सबसे बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक मजबूरी, परिवार से दूरी, मानसिक तनाव और गलत संगत युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले बड़े कारण हैं।घर से बाहर पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं पर परिवार की सीधी निगरानी कम हो जाती है। ऐसे में यदि सही माहौल न मिले तो वे आसानी से नशे के नेटवर्क का शिकार बन सकते हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में 40 मौ**तों की फर्जी खबर से मची सनसनी, हरकत में आया HRTC- पुलिस को दी शिकायत

इलाज और परिवार का साथ सबसे जरूरी

MMU के कुलपति और आईजीएमसी शिमला के पूर्व प्राचार्य डॉ. रवि चंद शर्मा का कहना है कि घर से बाहर रहने वाले बच्चों के साथ परिजनों को नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए। उनके व्यवहार में अचानक आने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नशे की चपेट में कई युवा

उन्होंने कहा कि अगर किसी युवा के नशे की चपेट में आने का संदेह हो तो बिना देर किए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। नशे से जूझ रहे युवाओं को तिरस्कार नहीं, बल्कि समय पर इलाज, काउंसलिंग और परिवार का सहयोग सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें