#अव्यवस्था
August 5, 2026
हिमाचल में इलाज राम भरोसे! बच्चों को थी कान में दर्द, सर्जरी के लिए मिली अगले साल की डेट
अस्पताल प्रबंधन पर फूटा परिजनों का गुस्सा
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चंबा जिले से कान का इलाज करवाने पहुंचे BPL परिवार के दो बच्चों को ऑपरेशन के लिए करीब एक साल बाद की तारीख मिलने से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
बच्चों के परिजनों का कहना है कि वे इलाज की उम्मीद लेकर टांडा पहुंचे थे, लेकिन यहां उन्हें समय पर उपचार के बजाय अगले साल की तारीख थमा दी गई। इससे नाराज परिजनों ने सोमवार को अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया।
परिजनों ने टांडा मेडिकल कॉलेज के ENT विभाग के बाहर प्रदर्शन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीश सरोच के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाए और व्यवस्था में सुधार की मांग की।
परिजनों ने स्थानीय विधायक आरएस बाली के खिलाफ भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यदि टांडा मेडिकल कॉलेज को प्रदेश की बड़ी उपलब्धि बताया जाता है तो यहां आधुनिक मशीनें, पर्याप्त स्टाफ और समय पर इलाज की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे परिजनों का कहना था कि दोनों बच्चे लंबे समय से कान की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। दर्द लगातार बना हुआ है और डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है।
ऐसी स्थिति में एक साल तक इंतजार करना किसी भी परिवार के लिए संभव नहीं है। उनका कहना है कि मशीनों की कमी का सबसे बड़ा खामियाजा गरीब और BPL परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके पास निजी अस्पतालों में इलाज कराने का विकल्प भी नहीं है।
परिजनों ने प्रदर्शन के दौरान हिमकेयर योजना का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि यदि सरकारी अस्पतालों में जरूरी मशीनें ही उपलब्ध नहीं होंगी तो स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मरीजों तक कैसे पहुंचेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि टांडा मेडिकल कॉलेज में आधुनिक उपकरणों की जल्द व्यवस्था की जाए, ताकि मरीजों को महीनों या वर्षों तक इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।
ENT विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीश सरोच ने बताया कि विभाग की करीब 83 लाख रुपये की एंडोस्कोपिक मशीन खराब पड़ी हुई है। इसी मशीन के माध्यम से कान से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मशीन खराब होने के कारण फिलहाल संबंधित सर्जरी संभव नहीं है। जैसे ही नई मशीन उपलब्ध होगी या खराब मशीन ठीक हो जाएगी, ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे।
डॉ. मुनीश सरोच ने बताया कि वर्ष 2007 के बाद से EN T विभाग को कोई नई मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। लगातार बढ़ रहे मरीजों के बावजूद विभाग पुराने संसाधनों के सहारे काम कर रहा है।
अब मशीन खराब होने से ऑपरेशन पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। ऐसे में मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।