शिमला। नशे की गिरफ्त और जल्दी पैसा कमाने की चाह शिमला में युवाओं के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रही है। जिला पुलिस की ओर से चिट्टा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चिंता बढ़ाने वाले हैं।
18 से 35 साल तक के कई युवा बन रहे नशा तस्कर
पुलिस के मुताबिक चिट्टा तस्करी के मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में करीब 80 फीसदी की उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच है। यानी बड़ी संख्या में युवा न केवल नशे के संपर्क में आ रहे हैं, बल्कि इसके अवैध कारोबार में शामिल होकर कानून के शिकंजे में भी पहुंच रहे हैं। इन मामलों में नाबालिगों के पकड़े जाने की बात भी सामने आई है, जिससे समस्या की गंभीरता और बढ़ जाती है।
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आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि शिमला में चिट्टा तस्करी का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। कई मामलों की पड़ताल के दौरान दूसरे राज्यों से जुड़े सप्लायर और तस्करों के बारे में जानकारी मिली।
अंतरराज्यीय नेटवर्क भी सक्रिय हैं
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल समेत अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों के माध्यम से नशे की सप्लाई किए जाने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है। इससे साफ है कि शिमला में चिट्टे की सप्लाई के पीछे अंतरराज्यीय नेटवर्क भी सक्रिय हैं।
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472 से ज्यादा गिरफ्तार
शिमला जिला पुलिस के अनुसार इस साल आठ महीनों के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत करीब 228 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 472 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने स्थानीय स्तर पर नशा बेचने वालों के साथ-साथ उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की है, जो दूसरे राज्यों से बैठकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे थे।
पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा
पुलिस की कार्रवाई में इस अवधि के दौरान करीब 4.5 किलोग्राम हेरोइन यानी चिट्टा भी बरामद किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार को केवल छोटे स्तर के सप्लायरों की गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है- ताकि सप्लाई के पीछे मौजूद मुख्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
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कम उम्र में खातों में लाखों का लेनदेन
चिट्टा तस्करी के मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर रखी। बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें 19, 20 और 30 वर्ष के युवाओं के खातों से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ था। पुलिस के मुताबिक इन युवाओं का कोई स्पष्ट कारोबार या नियमित कामकाज सामने नहीं आया, इसके बावजूद उनके बैंक खातों में बड़ी रकम का लेनदेन हुआ।
वित्तीय लेनदेन अहम सुराग
जांच एजेंसियों के लिए ऐसे वित्तीय लेनदेन अहम सुराग साबित हो रहे हैं। पुलिस अब केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि नशा किसके पास से बरामद हुआ, बल्कि यह भी जांच की जा रही है कि पैसा कहां से आया, किसे भेजा गया और इस पूरी सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
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19 साल की युवती, 20 साल का युवक गिरफ्तार
पुलिस ने हाल ही में ढली क्षेत्र में सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 19 वर्षीय युवती और 20 वर्षीय युवक से 65 ग्राम चिट्टा बरामद करने का दावा किया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाया गया तो पुलिस मुख्य सप्लायर तक पहुंची। इस मामले में पंजाब निवासी 32 वर्षीय समर सिंह उर्फ टाइगर को भी गिरफ्तार किया गया।
युवाओं को किया जा रहा इस्तेमाल
इस कार्रवाई से एक बार फिर सामने आया कि नशे के कारोबार में युवाओं का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। कम उम्र में तस्करी के मामलों में शामिल होने वाले आरोपी जहां खुद कानून की गिरफ्त में पहुंच रहे हैं, वहीं इनके पीछे मौजूद सप्लायर और नेटवर्क संचालक पुलिस की जांच के दायरे में आ रहे हैं।
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युवक से बरामद हुआ 1.120 किलो चिट्टा
शिमला पुलिस की अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में तारादेवी क्षेत्र का मामला भी शामिल है। यहां पुलिस ने 22 वर्षीय युवक विजय कुमार को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.120 किलोग्राम चिट्टा बरामद किया था। विजय कुमार हरियाणा के अंबाला का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार बरामद नशे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब छह करोड़ रुपये आंकी गई थी।
मुख्य तस्कर भी गिरफ्तार
इस मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने पंजाब से 21 वर्षीय शुभकरन सिंह उर्फ सुल्तान को भी गिरफ्तार किया, जिसे मुख्य तस्कर बताया गया है। इस केस में सामने आए अन्य आरोपियों की उम्र भी 35 वर्ष से कम बताई जा रही है। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी मात्रा में नशे की खेप से जुड़े होने का मामला पुलिस के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बना।
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28 साल का डेविड भी पुलिस के शिकंजे में
ठियोग क्षेत्र में भी पुलिस ने चिट्टा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 30.700 ग्राम चिट्टा बरामद किया। इस मामले में पुलिस ने विजय बिहारी उर्फ डेविड को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार 28 वर्षीय डेविड का नाम शिमला जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज नशा तस्करी के मामलों से जुड़ा हुआ है।
अलग-अलग हिस्सों में नेटवर्क
पुलिस ने उसकी कथित संलिप्तता रामपुर, कुमारसैन, बालूगंज और ठियोग में दर्ज मामलों में बताई है। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ तस्कर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में नेटवर्क के जरिए नशे की सप्लाई करने की कोशिश करते हैं।
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नशे के कारोबार पर चोट के लिए संपत्तियों की भी जांच
शिमला पुलिस अब नशा तस्करों की गिरफ्तारी के साथ उनकी आर्थिक गतिविधियों पर भी कार्रवाई कर रही है। पुलिस के मुताबिक वित्तीय जांच के आधार पर नशे के कारोबार से कथित तौर पर जुड़ी 6.28 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसका उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार से अर्जित धन और उससे बनाई गई संपत्तियों पर कार्रवाई करना है।
क्या बोले SSP शिमला?
SSP शिमला गौरव सिंह के अनुसार पुलिस पिछले वर्षों की तुलना में इस साल नशा तस्करों के खिलाफ ज्यादा प्रभावी कार्रवाई कर रही है। आठ महीनों में ही करीब 4.5 किलोग्राम हेरोइन बरामद की जा चुकी है। पुलिस का फोकस केवल नशा पकड़ने तक नहीं, बल्कि इसके पूरे नेटवर्क और आर्थिक स्रोतों तक पहुंचने पर भी है।
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युवाओं का नशे की ओर बढ़ना सबसे बड़ी चुनौती
चिट्टा तस्करी के मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की उम्र का आंकड़ा इस पूरी कार्रवाई का सबसे चिंताजनक पहलू है। यदि करीब 80 फीसदी आरोपी 18 से 35 वर्ष की आयु के हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ी बड़ी सामाजिक चुनौती भी बन जाता है।
नशे के जाल में फंस रहे युवा
पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद नशे की सप्लाई रोकने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कम उम्र में नशे के संपर्क में आने वाले युवाओं को तस्करी के नेटवर्क से दूर रखना और उन्हें समय रहते सही दिशा देना इस समस्या से निपटने की अहम कड़ी हो सकती है।
