#रोजगार
September 7, 2026
हिमाचल के अस्पतालों में खुली हजारों नौकरियां- 12वीं पास युवाओं को मिलेगा मौका, इतनी होगी सैलरी
अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों को मिलगे खास मदद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार जनता के हित के लिए अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और बुजुर्गों को अब अस्पताल की व्यवस्थाओं के बीच भटकना न पड़े- इसके लिए सरकार नई व्यवस्था पर काम कर रही है।
इसी कड़ी में प्रस्तावित 1000 रोगी मित्रों की भर्ती के नियमों में बदलाव पर मंथन चल रहा है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो नर्सिंग की डिग्री या डिप्लोमा की अनिवार्यता हटाकर 12वीं पास युवाओं को भी मौका मिल सकता है।
सरकार के स्तर पर भर्ती के मौजूदा प्रारूप की समीक्षा की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में रोगी मित्रों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं रखने पर विचार हो रहा है। पहले तैयार किए गए भर्ती प्रारूप में 12वीं के साथ नर्सिंग प्रशिक्षण और नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण जैसी शर्तें शामिल थीं। हालांकि, रोगी मित्रों की भूमिका चिकित्सा उपचार करने की नहीं होगी, इसलिए अब इन शर्तों में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
प्रस्तावित योजना के तहत 1000 रोगी मित्रों की नियुक्ति आउटसोर्स आधार पर की जानी है। इन्हें हर महीने 15 हजार रुपये का मानदेय देने का प्रावधान है।
सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों को इलाज से पहले और इलाज के दौरान मिलने वाली सामान्य सहायता को बेहतर बनाना है। इससे अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को जरूरी विभाग तक पहुंचने और प्रक्रियाओं को समझने में आसानी होगी।
रोगी मित्रों को डॉक्टर या नर्स की भूमिका नहीं निभानी होगी। उनका मुख्य काम मरीजों को अस्पताल की व्यवस्था समझाना और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध करवाना होगा। वे मरीजों को पंजीकरण केंद्र, OPD, वार्ड और संबंधित विभाग तक पहुंचाने में मदद करेंगे। खासतौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
योजना में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष प्राथमिकता देने की तैयारी है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अस्पताल में पंजीकरण, विभाग तक पहुंचने और अन्य सामान्य प्रक्रियाओं में सहायता उपलब्ध करवाने में रोगी मित्र मदद करेंगे।
बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग सहायता काउंटर बनाने की योजना भी प्रस्तावित है। आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज और चमियाना अस्पताल जैसे संस्थानों में ऐसी सुविधा विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
रोगी मित्रों की जिम्मेदारी सिर्फ मरीजों को रास्ता दिखाने तक सीमित नहीं होगी। अस्पतालों में अधिक भीड़ होने पर वे लोगों को व्यवस्थित करने और अलग-अलग सेवाओं तक पहुंचने में सहायता कर सकते हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके साथ मौजूद परिजनों को जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना कम पड़ेगा।
अस्पतालों में नर्सिंग और अन्य चिकित्सा कर्मियों को कई बार मरीजों के इलाज के अलावा उन्हें पंजीकरण, वार्ड या संबंधित विभाग तक पहुंचाने जैसी सामान्य मदद भी करनी पड़ती है। रोगी मित्रों की तैनाती होने पर ऐसे गैर-चिकित्सकीय कामों में मेडिकल स्टाफ की व्यस्तता कम हो सकती है। इससे डॉक्टर और नर्स मरीजों के उपचार पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
1000 रोगी मित्रों की योजना की घोषणा CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 17 मार्च 2025 को बजट 2025-26 में की थी। योजना पर करीब 18 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान लगाया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जून 2025 में भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया को लेकर प्रारूप तैयार करने का काम शुरू किया था। नवंबर 2025 में मंत्रिमंडल ने 1000 रोगी मित्रों की नियुक्ति को मंजूरी भी दी थी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 12वीं पास को पात्र बनाने का प्रस्ताव अभी नियमों में बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा है। सचिवालय स्तर पर इसको लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। कुछ अधिकारी अभी भी ANM या नर्सिंग योग्यता को अनिवार्य रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम भर्ती नियम क्या होंगे, यह सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।