कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक निजी स्कूल से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। नूरपुर उपमंडल में एक छात्र के साथ कथित मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है।
स्कूल प्रिंसिपल की क्रूरता
जानकारी के अनुसार सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्कूल के प्रधानाचार्य ने बच्चे को कथित रूप से इतनी बुरी तरह पीटा कि उसके शरीर पर चोटों के स्पष्ट निशान उभर आए। घटना के बाद बच्चे को चिकित्सकीय जांच के लिए सिविल अस्पताल नूरपुर ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया।
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होमवर्क न करने पर छात्र को पीटा
परिजनों का कहना है कि बच्चे का कसूर केवल इतना था कि वह अपना होमवर्क पूरा नहीं कर पाया था। आरोप है कि इसी बात को लेकर उसे कठोर दंड दिया गया। परिवार का दावा है कि बच्चे के शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटों के निशान दिखाई दिए हैं, जिससे वह मानसिक रूप से भी भयभीत हो गया है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
बच्चे की मां शारदा ने बताया कि घटना के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अभी सातवीं कक्षा में पढ़ता है और घटना के बाद से काफी डरा-सहमा हुआ है।
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पहली बार नहीं हुआ ऐसा
परिवार का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है जब बच्चे के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया हो। उनका कहना है कि पहले भी मारपीट की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन उस समय उन्होंने मामले को ज्यादा नहीं बढ़ाया।
स्कूल ने बोला झूठ
मां के अनुसार स्कूल प्रबंधन की ओर से यह कहा गया कि बच्चे को चोटें किसी शारीरिक गतिविधि या अभ्यास के दौरान लगी हैं, लेकिन परिवार इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है। उनका मानना है कि चोटों की प्रकृति किसी सामान्य गतिविधि से होने वाली नहीं लगती।
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ग्रामीणों में भी रोष
मामले की जानकारी गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैलने के बाद कई लोग परिवार के समर्थन में आगे आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी स्कूल से जुड़े व्यवहार संबंधी मुद्दों को लेकर अभिभावकों में असंतोष रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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अस्पताल में सामने आया मामला
स्थानीय निवासी बलविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें अस्पताल में एक महिला काफी परेशान दिखाई दी। बातचीत के दौरान उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने भी परिवार के साथ खड़े होकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहली जिम्मेदारी होती है। अगर किसी छात्र के साथ अनुचित व्यवहार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
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पुलिस कर रही जांच
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार छात्र का मेडिकल करवाया गया है और अब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
ASP धर्म चंद वर्मा ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मामले में उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।
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बच्चों के अधिकारों पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ व्यवहार और अनुशासन के तरीकों को लेकर बहस छेड़ दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए शारीरिक दंड का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। आधुनिक शिक्षा प्रणाली संवाद, परामर्श और सकारात्मक मार्गदर्शन पर जोर देती है।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए स्कूल भेजते हैं और उन्हें उम्मीद होती है कि वहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा। ऐसे मामलों से अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
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कड़ी कार्रवाई की मांग
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट और मेडिकल निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। वहीं, परिवार और ग्रामीण निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
