मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए चयन कराने के मामलों पर विजिलेंस लगातार शिकंजा कस रही है। अब शिक्षा विभाग में टीजीटी मेडिकल भर्ती के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के कथित फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने जांच तेज कर दी है।

बैचवाइज भर्ती में सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में बैचवाइज आधार पर हुई टीजीटी मेडिकल भर्ती के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ लेकर चयन सूची में स्थान प्राप्त किया।

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आरोप है कि इस प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्र वास्तविक पात्रता के अनुरूप नहीं थे। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में आ सकती हैं। शुरुआती जांच में चार लोगों को संदेह के दायरे में रखा गया है और उनके दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

पंचायत और राजस्व रिकॉर्ड खंगाल रही विजिलेंस

विजिलेंस अधिकारियों ने जांच के तहत संबंधित पंचायतों और राजस्व विभाग से रिकॉर्ड तलब किया है। अभ्यर्थियों की आय, संपत्ति और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कहीं अनियमितता या मिलीभगत तो नहीं हुई।

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प्रारंभिक जांच के आधार पर चार लोगों को जांच के दायरे में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य लागू धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

हिमाचल में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की भर्ती के दौरान भी फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में कई डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी और कुछ ने जांच के बीच अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया था। अब शिक्षा विभाग में सामने आए इस नए मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सूत्रों के अनुसार विजिलेंस अब केवल एक भर्ती तक सीमित नहीं रहना चाहती। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न विभागों में हुई नियुक्तियों के दौरान इस्तेमाल किए गए ईडब्ल्यूएस और अन्य आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों की भी चरणबद्ध तरीके से जांच की जा रही है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी नौकरियों का लाभ केवल वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को ही मिले।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी अगली कार्रवाई

फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही हैं या नहीं। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी अलग से जांच की जा सकती है।

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