शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत से जुड़े गंभीर मामले में आरोपी ससुर को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्य इस स्तर पर जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल सुनवाई में कुछ समय लगने को आधार बनाकर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
ससुर अभी भी न्यायिक हिरासत में
दरअसल, मामला सोलन जिले के नालागढ़ क्षेत्र का है, जहां अप्रैल 2025 में एक विवाहिता की मौत के बाद उसके ससुराल पक्ष के कई सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
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जांच के दौरान पुलिस ने पति, सास, ससुर और अन्य परिजनों को गिरफ्तार किया था। हालांकि कुछ आरोपियों को अदालत से राहत मिल चुकी है, लेकिन ससुर अभी भी न्यायिक हिरासत में है।
नवंबर 2024 में हुई थी शादी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि ट्रायल में देरी हो रही है और उसके त्वरित न्याय के अधिकार का हनन हो रहा है। वहीं अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में गवाहों की प्रक्रिया जारी है और ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि जानबूझकर सुनवाई को लंबा खींचा जा रहा है। इसलिए केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
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मृतका की शादी नवंबर 2024 में हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवाहिता को कम दहेज लाने को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। परिवार की ओर से कार की मांग किए जाने और उसे पूरा न करने पर मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी
शिकायत में यह भी कहा गया कि पीड़िता की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान नहीं किया गया और उस पर अपनी आस्था के विपरीत काम करने का दबाव बनाया जाता था। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब वे बेटी की हालत देखने ससुराल पहुंचे तो उसे अचेत अवस्था में पाया गया, लेकिन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने में भी बाधाएं खड़ी की गईं।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से आरोपी की भूमिका की जांच आवश्यक प्रतीत होती है। ऐसे में इस समय जमानत देना न्यायहित में नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में मुकदमे की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबित रहती है तो आरोपी दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। इस फैसले के बाद फिलहाल आरोपी ससुर को जेल में ही रहना होगा, जबकि मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।
