शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत ने सख्त संदेश देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में एक शिक्षक को दोषी ठहराते हुए उसे जेल भेज दिया है।

शिक्षक को 6 साल की जेल

अदालत ने इस अपराध को गंभीर मानते हुए दोषी को कठोर कारावास के साथ आर्थिक दंड भी दिया है। अदालत ने दोषी शिक्षक को 6 साल के लिए जेल भेज दिया है और साथ ही जुर्माना अदा करने की भी सजा सुनाई है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला 6 नवंबर, 2024 को सुन्नी थाने में दर्ज हुआ था। करयाली गांव, सुन्नी का रहने वाला आरोपी जय प्रकाश उर्फ जेपी (46) उस समय एक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत था।

छात्रा के साथा किया गंदा काम

आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की घटना को अंजाम दिया- जिससे शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर भी सवाल खड़े हुए। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट, रेप/पॉक्सो), शिमला की अदालत में हुई।

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अदालत ने दी कठोर सजा

अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत उसे 6 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही स्पष्ट किया गया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।

पुलिस ने पेश किए ठोस सबूत

पुलिस की ओर से इस मामले की जांच संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ की गई। पीड़िता की पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए समय पर अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए गए। इसी मजबूत जांच के चलते आरोपी को सजा दिलाना संभव हो पाया।

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बच्चों के साथ अपराध बर्दाश्त नहीं

फैसले के बाद शिमला पुलिस ने दोहराया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थानों सहित किसी भी स्थान पर बच्चों के साथ होने वाले अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित व सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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