शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के लिए प्रस्तावित 900 असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की भर्ती फिलहाल कानूनी विवाद में फंस गई है। प्रदेश हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामले की अगली सुनवाई तक न तो किसी नए अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए और न ही किसी को कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाए।

भर्ती नियमों में नहीं किए गए आवश्यक संशोधन

दरअसल, मामला तब सामने आया जब अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि सरकार ने एक नई नीति के तहत असिस्टेंट स्टाफ नर्स नाम से नया कैडर तैयार कर 900 पद भरने का फैसला लिया, लेकिन इसके लिए संबंधित भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किए गए। साथ ही इन पदों के लिए कोई स्पष्ट वेतनमान भी निर्धारित नहीं किया गया था। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस को आया लड़की का फोन, बोली- मैंने जह*र निगल लिया.. मुझे बचा लो

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से यह दलील दी गई कि नियुक्तियां सरकार की नई नीति के तहत की जा रही हैं, लेकिन न्यायालय इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप होना चाहिए और केवल नीति के आधार पर नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

नियमित नर्सिंग स्टाफ के 1500 से अधिक पद खाली

खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य में आउटसोर्स और संविदा नियुक्तियों से जुड़े मामलों पर पहले से सुनवाई चल रही है। ऐसे में नया कैडर बनाकर भर्ती प्रक्रिया शुरू करना कई कानूनी सवाल खड़े करता है। अदालत ने सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताया जाएगा कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न विभागों में कितने आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त किए गए और उनके मुकाबले कितने नियमित पद अब भी रिक्त हैं।

यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार 12 हजार मल्टी टास्क वर्करों को देगी तोहफा- जल्द लाएगी स्थायी पॉलिसी

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में सैकड़ों स्वीकृत पद खाली हैं, जबकि चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी बड़ी संख्या में नर्सों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। दोनों विभागों को मिलाकर नियमित नर्सिंग स्टाफ के 1500 से अधिक पद खाली बताए जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

अदालत ने इस मुद्दे पर भी जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य मुद्दे पर भी नाराजगी जताई। न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के विदेश दौरे का उल्लेख करते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे राज्य में उच्च अधिकारी लंबे विदेशी दौरे पर जा रहे हैं। अदालत ने इस विषय पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।

यह भी पढ़ें : देवभूमि की गंदगी देख विदेशी महिला बोली- मैं आपके देवताओं का आपसे ज्यादा सम्मान करती हूं

अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी। तब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित रहेगी और सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि बिना भर्ती नियमों और सेवा शर्तों में संशोधन किए नई नियुक्तियों को किस आधार पर वैध माना जा सकता है। इस फैसले का असर स्वास्थ्य विभाग की भर्ती योजनाओं और नर्सिंग क्षेत्र में रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें