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August 1, 2026

हिमाचल पुलिस चौकी के बजट से चमका दी SP की कोठी, विजिलेंस के रडार पर संजीव गांधी..

पैसे कहां से आए और कहां खर्च हुए, होगी जांच

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Shimla News

शिमला। हिमाचल पुलिस से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। SP शिमला के सरकारी आवास की मरम्मत पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पुलिस चौकी की मरम्मत के लिए मंजूर रकम का भी इस्तेमाल SP आवास के काम में किया गया। मामले में पुलिस मुख्यालय ने ऑडिट कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है, वहीं तत्कालीन SP संजीव गांधी समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

SP आवास की मरम्मत पर खर्च हुए 14 लाख रुपये

रिपोर्ट के मुताबिक, एसपी आवास की मरम्मत और रखरखाव पर कुल 14,07,392 रुपये खर्च किए गए। इसमें 11,57,392 रुपये जिला पुलिस के आवासीय मद से खर्च किए गए। इसके अलावा 2.50 लाख रुपये ऐसी रकम थी, जो मूल रूप से ठियोग के एसडीएम (नागरिक) की ओर से पुलिस चौकी शोघी की मरम्मत और रखरखाव के लिए मंजूर की गई थी।

 

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शोघी पुलिस चौकी के पैसे भी खर्च करने का आरोप

मामले में सबसे अहम सवाल 2.50 लाख रुपये को लेकर है। यह रकम पुलिस चौकी शोघी की मरम्मत के लिए स्वीकृत हुई थी, लेकिन इसे एसपी आवास की मरम्मत में खर्च किए जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस मुख्यालय इस बात की जांच करवा रहा है कि यह पैसा किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत इस्तेमाल किया गया। 

पुलिस मुख्यालय ने बनाई तीन सदस्यीय ऑडिट कमेटी

SSP शिमला की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष ऑडिट कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को पूरे मामले की जांच करके एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में खर्च से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड को देखा जाएगा।

 

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SSP की रिपोर्ट के बाद सामने आया मामला

यह मामला 30 जुलाई को SSP शिमला की ओर से पुलिस महानिदेशक को भेजी गई रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच SP के सरकारी आवास में करवाए गए मरम्मत और रखरखाव के कामों पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में खर्च की प्रक्रिया के साथ-साथ सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जरूरत बताई गई है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष ऑडिट कमेटी का गठन किया है।

उप नियंत्रक वित्त एवं लेखा करेंगे कमेटी की अध्यक्षता

DGP की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, तीन सदस्यीय ऑडिट कमेटी की अध्यक्षता पुलिस मुख्यालय के उप नियंत्रक (वित्त एवं लेखा) करेंगे। कमेटी SP आवास में हुए मरम्मत और रखरखाव के खर्च से जुड़े पूरे मामले की बारीकी से जांच करेगी।

 

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पैसे कहां से आए और कहां खर्च हुए, होगी जांच

कमेटी सबसे पहले यह देखेगी कि SP आवास की मरम्मत के लिए पैसा किस मद से लिया गया था और इसके लिए किस स्तर से मंजूरी मिली थी। इसके साथ ही बजट कितना आवंटित किया गया और वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई, इसकी भी जांच की जाएगी।

मंजूरी से लेकर खर्च तक पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाएगा

ऑडिट कमेटी मरम्मत कार्यों से जुड़े सभी वित्तीय और निर्माण रिकॉर्ड की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि काम करवाने से पहले जरूरी मंजूरियां ली गई थीं या नहीं और खर्च तय वित्तीय नियमों और सरकारी प्रक्रिया के अनुसार किया गया या नहीं।

 

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सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल पर भी नजर

जांच के दौरान कमेटी यह भी देखेगी कि कहीं सरकारी धन का अनधिकृत इस्तेमाल, पैसों का गलत उपयोग या तय प्रक्रिया का उल्लंघन तो नहीं हुआ। अगर जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो उससे जुड़े अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका भी तय की जाएगी। 

गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदारी होगी तय

पुलिस मुख्यालय के आदेश में साफ कहा गया है कि अगर जांच में वित्तीय गड़बड़ी, पैसों के गलत इस्तेमाल या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। कमेटी ऐसे मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए अपनी सिफारिश भी देगी।

 

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सभी संबंधित शाखाओं से मांगा गया मूल रिकॉर्ड

जांच को पूरा करने के लिए सभी संबंधित शाखाओं और अधिकारियों को अपने मूल रिकॉर्ड कमेटी के सामने पेश करने और जांच में पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल करेगी।

एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

विशेष ऑडिट कमेटी को एक सप्ताह के भीतर पुलिस मुख्यालय को अपनी विस्तृत और साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि मरम्मत कार्यों पर हुए खर्च में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।

 

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पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, विशेष ऑडिट कमेटी का गठन सरकारी पैसे के इस्तेमाल में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन से जुड़े खर्च की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जा सके।

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