#अव्यवस्था
July 27, 2026
हिमाचल में कैंची और आरी कांड- किसानों से की गई लूट, घोटाले पर जांच के निर्देश
RTI में सामने आई खरीद की जानकारी
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किन्नौर। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के वाटरशेड फंड से कृषि उपकरणों की खरीद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले कैंची खरीद को लेकर सवाल उठे थे और अब किन्नौर जिले के कल्पा विकास खंड की एक पंचायत में आरी खरीद को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
आरोप है कि बाजार में करीब 271 रुपये में मिलने वाली आरी को 580 रुपये प्रति आरी की दर से खरीदा गया। मामला सामने आने के बाद सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार पंचायत ने बड़ी संख्या में आरी खरीदी और इन्हें कैंची के साथ लाभार्थियों में वितरित किया। आरोप है कि ये उपकरण किसानों को नि:शुल्क दिए जाने थे, लेकिन इसके बावजूद लाभार्थियों से कुल कीमत का 10 प्रतिशत हिस्सा लिया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि यह राशि पेयजल योजना के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च की जाएगी।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कैंची खरीद को लेकर विवाद सामने आया था। आरोप था कि करीब 4,600 रुपये कीमत वाली कैंची को 5,800 रुपये में खरीदा गया। अब आरी खरीद के नए आरोपों ने पंचायत स्तर पर खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी फंड के इस्तेमाल पर नई बहस छेड़ दी है।
आरी का उपयोग मुख्य रूप से सेब और अन्य फलदार पौधों की छंटाई में किया जाता है। आरोप है कि सामान्य बाजार कीमत की तुलना में काफी अधिक दाम पर खरीद की गई, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
किन्नौर के उपायुक्त अमित कुमार शर्मा ने कहा कि यदि बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीद की गई है तो पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नि:शुल्क वितरित किए जाने वाले उपकरणों के बदले लाभार्थियों से राशि ली गई है तो उस पहलू की भी जांच होगी।
वहीं, पंचायतीराज विभाग के सचिव सी. पाल रासू ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि विस्तृत जानकारी जिला प्रशासन से ही प्राप्त हो सकेगी और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।