#विविध
June 18, 2026
सुक्खू सरकार 12 हजार मल्टी टास्क वर्करों को देगी तोहफा- जल्द लाएगी स्थायी पॉलिसी
सरकारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं मल्टी टास्क वर्कर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार मल्टी टास्क वर्करों के लिए राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से नियमित नीति और बेहतर सेवा शर्तों की मांग कर रहे इन कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार जल्द ही स्थायी पॉलिसी लाने की तैयारी में है। इस कदम से हजारों कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है।
मिली जानकारी के अनुसार, मल्टी टास्क वर्करों से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति जल्द बैठक करने जा रही है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में मंत्री रोहित ठाकुर और राजेश धर्माणी भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि आगामी बैठक में नीति के मसौदे पर विस्तार से चर्चा कर अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार पहले भी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मल्टी टास्क वर्करों के लिए नीति बनाने का संकेत दे चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में कहा था कि सरकार इन कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक व्यवस्थित नीति तैयार करेगी, ताकि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो सके।
वर्तमान समय में शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग सहित कई सरकारी संस्थानों में हजारों मल्टी टास्क वर्कर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी कई वर्षों से कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उनके लिए कोई स्पष्ट सेवा नीति लागू नहीं हो पाई है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन लगातार सरकार से स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
मल्टी टास्क वर्करों का कहना है कि मौजूदा मानदेय बढ़ने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। पहले जहां उन्हें 4 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, वहीं वर्तमान सरकार ने चरणबद्ध तरीके से इसे बढ़ाकर 5500 से 6000 रुपये तक पहुंचाया है। हालांकि कर्मचारियों का मानना है कि महंगाई के दौर में यह राशि पर्याप्त नहीं है और उनके लिए दीर्घकालिक रोजगार सुरक्षा भी जरूरी है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग है कि पांच वर्ष या उससे अधिक समय से सेवाएं दे रहे मल्टी टास्क वर्करों के लिए नियमितीकरण अथवा स्थायी नीति बनाई जाए। उनका तर्क है कि कई कर्मचारी पिछले पांच से सात वर्षों से लगातार विभागों में कार्य कर रहे हैं और सरकारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में भी इस विषय पर एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की गई थी। उस समय मल्टी टास्क वर्करों को मात्र 3 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। इसके बाद समय-समय पर मानदेय में वृद्धि हुई, लेकिन स्थायी नीति का मुद्दा अब तक अधूरा ही रहा।