#अव्यवस्था
July 24, 2026
हिमाचल सरकार की अनदेखी पड़ी भारी! केंद्र के एक आदेश पर बंद हो गईं 200+ ITI यूनिट; 5000 सीटें खत्म
ITI में इंस्ट्रक्टरों की भर्ती करना भूली हिमाचली सरकारें, केंद्र ने लिया सख्त फैसला
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शिमला। केंद्र सरकार से आए एक कड़े आदेश ने हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। प्रदेश की सरकारों की लगातार अनदेखी का खामियाजा अब युवाओं को भुगतना पड़ रहा है, जहां 200 से अधिक आईटीआई (ITI) यूनिट्स (क्लासों) पर ताला लटकने की नौबत आ गई है। केंद्र के इस बड़े फैसले से न केवल कई सरकारी आईटीआई संस्थानों के वजूद पर संकट गहरा गया है, बल्कि हुनरमंद बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के भविष्य पर भी अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं।
हिमाचल में सरकारों ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए जगह-जगह आईटीआई तो खोल दीं, लेकिन उनमें इंस्ट्रक्टरों की भर्ती करना भूल गईं। सालों से ये संस्थान गेस्ट फैकल्टी और कामचलाऊ व्यवस्था के सहारे घिसट रहे थे। अब केंद्र सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) द्वारा कराई गई ई-केवाईसी और मैपिंग के बाद व्यवस्था की पोल खुल गई है। केंद्र सरकार ने बिना इंस्ट्रक्टरों के चल रही आईटीआई को बंद करने के निर्देश दे दिए हैं, इन आदेशों के बाद अब हिमाचल के तकनीकी शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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जानकारी के अनुसार पिछले कई वर्षों में हिमाचल प्रदेश की विभिन्न सरकारों ने राजनीतिक विस्तार और स्थानीय मांगों को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) तो खोल दिए, लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए नियमित इंस्ट्रक्टरों की भर्ती नहीं की गई। कई संस्थान वर्षों तक गेस्ट फैकल्टी और सीमित स्टाफ के भरोसे चलते रहे। अब यही लापरवाही प्रदेश के तकनीकी शिक्षा तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
केंद्र सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशालय (Directorate General of Training) DGT ने सभी राज्यों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रत्येक ट्रेड की प्रत्येक यूनिट के लिए नियमित इंस्ट्रक्टर होना अनिवार्य है। इसी के तहत इंस्ट्रक्टरों की ई-केवाईसी और मैपिंग कराई गई। मैपिंग पूरी होने के बाद जिन यूनिटों में निर्धारित मानकों के अनुसार इंस्ट्रक्टर उपलब्ध नहीं पाए गए, वहां प्रवेश और संचालन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
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केंद्र के निर्देशों के बाद हिमाचल प्रदेश में 200 से अधिक आईटीआई यूनिट बंद हो चुकी हैं। इसका सीधा असर प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ा है। इस बार लगभग 5,000 सीटें कम हो गई हैं, जिससे हजारों अभ्यर्थी सरकारी आईटीआई में दाखिले से वंचित रह सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द भर्ती नहीं हुई तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल कुछ मामलों में सीमित राहत के चलते स्थिति संभली हुई है, लेकिन यदि नियमित इंस्ट्रक्टरों की भर्ती नहीं हुई तो अगले वर्ष और बड़ी संख्या में ट्रेड और यूनिट प्रभावित हो सकती हैं। इससे प्रदेश के कई सरकारी आईटीआई में प्रशिक्षण गतिविधियां लगभग ठप होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
प्रदेश की करीब 131 सरकारी आईटीआई में इंस्ट्रक्टरों के 722 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। वर्ष 2022 में कुछ पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद रिक्त पद लगातार बढ़ते गए और अब उसका असर सीधे प्रशिक्षण व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
सरकारी संस्थानों में सीटें कम होने के कारण अब अनेक विद्यार्थियों को मजबूरी में निजी आईटीआई का विकल्प चुनना पड़ सकता है। निजी संस्थानों में अपेक्षाकृत अधिक फीस होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आईटीआई यूनिट लगातार बंद होती रहीं तो सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए भवन, आधुनिक मशीनें और प्रशिक्षण उपकरण भी उपयोग से बाहर हो सकते हैं। इससे सार्वजनिक धन का बड़ा हिस्सा निष्प्रभावी होने की आशंका है।
आईटीआई संस्थान प्रदेश और देश के उद्योगों के लिए कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि प्रशिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है तो भविष्य में उद्योगों को प्रशिक्षित तकनीशियन और तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
आईटीआई में एक ही ट्रेड के अंतर्गत आवश्यकता के अनुसार एक से तीन यूनिट संचालित की जाती हैं। प्रत्येक यूनिट में सामान्यतः 20 से 24 प्रशिक्षु प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार प्रत्येक यूनिट के लिए अलग नियमित इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति अनिवार्य है। इसी मानक के आधार पर प्रशिक्षण की अनुमति दी जाती है।
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केंद्र के निर्देशों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश सरकार रिक्त पड़े इंस्ट्रक्टरों के पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाती है। यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में तकनीकी शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर हजारों युवाओं के रोजगार और कौशल विकास पर पड़ेगा।