#अव्यवस्था
July 30, 2026
हिमाचल: बंद सड़कों से किसान लाचार, गाड़ियों में सड़ गई नगदी फसलें; नाले में बहाने को हुए मजबूर
सड़कें बंद होने से मंडियों तक नहीं पहुंच रही नगदी फसलें किसानों को हो रहा भारी नुकसान
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, लैंडस्लाइड और पहाड़ों के दरकने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह भूस्खलन के कारण प्रदेश की कई मुख्य व संपर्क सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो चुकी है, जिसका सबसे बड़ा और सीधा खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत कर उगाई गई नगदी फसलें समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कई जगहों पर तो रास्ते बंद होने के कारण सब्जियां गाड़ियों में खड़े-खड़े ही सड़ रही हैं, तो कहीं किसान लाचारी में अपनी फसलें नाले में बहाने को मजबूर हैं।
ऐसी ही तस्वीर मंडी जिले के झटिंगरी क्षेत्र से सामने आई है, जहां थलटूखोड़-मढ़ सड़क मार्ग भूस्खलन के कारण कई दिनों से बंद पड़ा है। सड़क बंद होने से क्षेत्र के किसानों की मूली, गोभी और अन्य नगदी फसलें बाजार तक नहीं पहुंच सकीं। मजबूरी में किसानों को अपनी तैयार उपज का बड़ा हिस्सा बर्बाद करना पड़ा।
सड़कों के बंद होने से उपजे दर्द का ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला नजारा मंडी जिले के उपमंडल झटिंगरी में देखने को मिला। थलटूखोड़-मढ़ सड़क मार्ग बीते सोमवार से भूस्खलन के कारण पूरी तरह ठप पड़ा है। मंडी के झुकाण गांव के जीप चालक व किसान सुनील कुमार सहित अन्य ग्रामीणों की नगदी फसलें बाजार तक नहीं पहुंच सकीं। मजबूरी ऐसी बनी कि किसानों को लगभग 15 क्विंटल तैयार मूली नाले में फेंकनी पड़ी।
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वहीं, किसान हरि सिंह, ओम चंद और नंद लाल जैसे अन्य ग्रामीणों ने गोभी की फसल को कई किलोमीटर तक पीठ पर ढोकर जैसे-तैसे मुख्य मार्ग तक तो पहुंचाया, लेकिन देरी होने की वजह से गोभी की गुणवत्ता गिर गई और वह पीली पड़ने लगी। किसानों का कहना है कि अब फसल की लागत निकाल पाना भी नामुमकिन हो गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम में हर साल यही स्थिति बनती है। सड़कें बंद होते ही सबसे पहले किसानों की नगदी फसलें प्रभावित होती हैं। सब्जियां जल्दी खराब होने वाली फसलें हैं, इसलिए कुछ घंटों या एक-दो दिन की देरी भी भारी नुकसान का कारण बन जाती है। इस बार लगातार हो रही बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि केवल खेती ही नहीं, बल्कि सड़कें बंद होने से गांवों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, मरीजों की आवाजाही और दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। लोगों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से बंद मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने की मांग की है, ताकि किसानों की बची हुई फसल समय रहते बाजार तक पहुंच सके।
एक तरफ जहां बुनियादी ढांचा चरमरा गया है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग (IMD शिमला) ने अगले कुछ दिनों तक राहत न मिलने के संकेत दिए हैं। प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी रफ्तार से सक्रिय हो गया है। मौसम केंद्र ने 30 जुलाई से 5 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है।
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मौसम विभाग के अनुसार, कांगड़ा और मंडी जिलों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर जैसे जिलों में भी गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अंदेशा जताया गया है। इसके अलावा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचे क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की है। संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Flood), लैंडस्लाइड, जलभराव और नदियों-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों के पास न जाएं और अनावश्यक यात्रा से बचें।