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July 29, 2026

सुक्खू सरकार को HC की सख्त चेतावनी, कहा- मां चिंतपूर्णी मंदिर मामले में आदेशों पर अमल नहीं हुआ तो...

सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

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himachal Chintpurni Temple

शिमला/ऊना। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर से जुड़े विकास और निर्माण कार्यों को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंदिर परिसर में पार्किंग, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं और सौंदर्यीकरण से जुड़े पूर्व आदेशों के पालन में देरी को लेकर अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है।

कोर्ट ने कहा है कि यदि आवश्यक कदम समय पर नहीं उठाए गए तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए नोटिस जारी किए जा सकते हैं।

पूर्व आदेशों के पालन में देरी पर हाईकोर्ट नाराज

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने की। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता को साफ तौर पर कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और उसकी स्थिति अदालत के समक्ष रखी जाए।

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कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की तय हो सकती है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। सुनवाई के दौरान उपायुक्त ऊना की ओर से अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें मंदिर क्षेत्र के आसपास पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर अब तक की कार्रवाई का ब्यौरा दिया गया।

श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर भारी वाहनों के लिए पार्किंग विकसित करने के उद्देश्य से सरकारी जमीन चिन्हित की गई है। इस जमीन को मंदिर ट्रस्ट के नाम स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा मंदिर परिसर से सटी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चलने की बात भी सरकार ने अदालत के सामने रखी है।

 

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प्रस्तावित विकास योजना के तहत मंदिर परिसर के आसपास श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जाना है। इसमें शौचालय, पेयजल, विश्राम स्थल और अतिरिक्त पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और आसपास के क्षेत्र को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना भी बताई गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि इन योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ है।

सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

मंदिर परिसर के विस्तार, सौंदर्यीकरण और पार्किंग व्यवस्था को लेकर पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश जारी हो चुके हैं। इन आदेशों के अनुपालन में देरी का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता रजनीश खोसला ने दिसंबर 2025 में अवमानना याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि मंदिर क्षेत्र में पार्किंग और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े न्यायालय के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने में काफी समय बीत गया, लेकिन परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। 

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और मध्यस्थता पक्ष ने सरकार की ओर से बताई गई प्रगति को अपर्याप्त बताया। उनका आरोप है कि निर्धारित योजना के मुताबिक काम आगे नहीं बढ़ा और पूर्व आदेशों के अनुपालन में देरी हुई। मध्यस्थता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास सूद ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि 30 दिसंबर 2024 के हाईकोर्ट के आदेश का निर्धारित समय में पालन नहीं हुआ। इसके अलावा सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में भूमि और अधिग्रहण की स्थिति को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने की आपत्ति भी जताई गई।

DC ऊना की रिपोर्ट पर भी आपत्ति

याचिकाकर्ता पक्ष ने उपायुक्त ऊना की ओर से पेश की गई स्थिति रिपोर्ट को भी पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना था कि रिपोर्ट में परियोजना की वास्तविक प्रगति और अदालत के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसी आधार पर अदालत से राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई। 

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हाईकोर्ट ने सरकार को आवश्यक कार्रवाई करते हुए अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगले चरण में यह पाया गया कि पूर्व आदेशों के अनुरूप जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित है। ऐसे में अगली तारीख पर सरकार की ओर से दाखिल जवाब और मंदिर क्षेत्र के विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

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