हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक चौंकाने वाला और चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने फास्टैग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह क्षेत्र नादौन से जुड़ा है।

बंद पड़े खटारा स्कूटर का कटा TOLL

यहां एक घर में खड़े खटारा स्कूटर का सोलन में चालान कटा है। हैरानी की बात ये है कि जिस स्कूटर का चालान कटा है- वो स्कूटर पिछले दो साल से घर में बंद पड़ा है। ऐसे में खटारा स्कूटर का सोलन के सनवारा टोल प्लाजा में 15 हजार रुपये TOLL कटना बेहद हैरानगी की बात है।

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क्या है पूरा मामला?

नादौन से सामने आए इस मामले ने ऑनलाइन चालान व्यवस्था और वाहन नंबर के दुरुपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां वार्ड नंबर चार निवासी नवल अवस्थी के पुराने स्कूटर का दो बार चालान कट गया। जबकि उनका दावा है कि स्कूटर पिछले दो वर्षों से घर में ही खड़ा है और सड़क पर निकला ही नहीं।

दो बार कटा चालान

अवस्थी के अनुसार, उनके स्कूटर नंबर HP21-1537 के नाम से 26 और 27 फरवरी को दो चालान जारी किए गए। दोनों चालान कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सनवारा टोल प्लाजा के पास काटे गए बताए जा रहे हैं।

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15 हजार कटा चालान

पहले दिन 5 हजार रुपये और अगले दिन 10 हजार रुपये का चालान दर्शाया गया है। कुल मिलाकर 15 हजार रुपये की राशि बनती है। नवल अवस्थी ने बताया कि उनका स्कूटर वर्ष 1992 में बड़सर में पंजीकृत हुआ था और समय-समय पर नवीनीकरण भी वहीं से करवाया गया।

 

दो साल से खड़ा है स्कूटर

कुछ समय पहले नई स्कूटी खरीदने के बाद पुराना स्कूटर उपयोग में नहीं है और पिछले करीब दो वर्षों से घर के आंगन में ही खड़ा है। ऐसे में इतनी दूर सोलन जिले तक जाकर चालान कटने का सवाल ही नहीं उठता। अवस्थी नादौन के पत्तन बाजार में दुकान करते हैं। उनका कहना है कि वह रोजाना अपने काम में व्यस्त रहते हैं और स्कूटर की हालत भी ऐसी नहीं कि उसे लंबी दूरी तक चलाया जा सके।

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फर्जी नंबर प्लेट की आशंका

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी ने उनके वाहन नंबर का दुरुपयोग किया है? संभावना जताई जा रही है कि किसी अन्य वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर नियमों का उल्लंघन किया गया हो और चालान मूल पंजीकृत मालिक के नाम जारी हो गए हों।

नंबर प्लेट पर चालान जारी

ऑनलाइन चालान प्रणाली में कैमरों के माध्यम से नंबर प्लेट पढ़कर चालान जारी किए जाते हैं। ऐसे में अगर किसी वाहन पर समान या फर्जी नंबर प्लेट लगी हो, तो असली मालिक को भी चालान का सामना करना पड़ सकता है।

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पुलिस जांच की बात

इस संबंध में थाना प्रभारी निर्मल सिंह ने बताया कि यदि लिखित शिकायत दी जाती है तो मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित टोल प्लाजा और ट्रैफिक निगरानी कैमरों की फुटेज खंगाली जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चालान किस वाहन पर और किन परिस्थितियों में जारी किए गए।

उठ रहे कई सवाल

यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है-

  • क्या ऑनलाइन चालान प्रणाली में तकनीकी खामी है?
  • क्या किसी गिरोह द्वारा फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया जा रहा है?
  • वाहन मालिक अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएं?

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जल्द सच्चाई आएगी सामने

फिलहाल, नवल अवस्थी इस मामले को लेकर चिंतित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा। यह मामला प्रशासन के लिए भी सतर्कता का संकेत है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।

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