मंडी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की सुविधाओं के दावों की असलियत राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक फैसले में उजागर हो गई है। मंडी जिला के पधर तहसील निवासी इंद्रजीत सिंह को 6 साल पहले हुई घटना पर दिल्ली से मंडी तक की बस यात्रा और सामान ढुलाई में हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार पर अब न्याय मिल गया है।
बिना वजन किए जबरन थमा दिया टिकट
10 अप्रैल 2019 को इंद्रजीत सिंह ने दिल्ली से मंडी तक की यात्रा के लिए 574 रुपये और सामान ले जाने के लिए अलग-अलग चार टिकटों में 1,565 रुपये का भुगतान किया। सफर के दौरान रोपड़, बिलासपुर और नेरचौक से अलग-अलग बिंदुओं पर उन्होंने 200 किलोग्राम से ज्यादा सामान के लिए उचित टिकट लिए। लेकिन सुंदरनगर डिपो के फ्लाइंग स्क्वायड ने बिना वजन किए जबरन 1,108 रुपये का एक और अतिरिक्त टिकट थमा दिया।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना एचआरटीसी का दोष
पीड़ित ने पहले मंडी उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से आवेदन खारिज हो गया। इसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने इस मामले को गंभीर मानते हुए 27 अप्रैल 2024 को मंडी आयोग के आदेश को खारिज कर दिया। अब HRTC को 1,108 रुपये 45 दिन के भीतर लौटाने होंगे और साथ ही शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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क्या कहा आयोग ने?
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक तौल या ठोस आधार के जबरन अतिरिक्त टिकट लेना अनुचित व्यापार व्यवहार है। छह साल लंबी लड़ाई के बाद इंद्रजीत सिंह को मिला यह न्याय न केवल एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह हिमाचल में HRTC जैसे विभागों की गैरजिम्मेदाराना कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान भी है।
