शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हालात सिर्फ खराब सड़कों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ट्रैफिक की समस्या भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। जगह-जगह टूटी सड़कों और बढ़ते जाम के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। लोगों को अपने काम तक पहुंचने में काफी समय लग रहा है और सफर भी जोखिम भरा हो गया है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जिसने प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क की हालत गांव के रास्तों से बतर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला शिमला के ठियोग-नारकंडा वाला नेशनल हाईवे-5 इन दिनों बेहद खराब हालत में है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोगों का कहना है कि गांव की कच्ची पगडंडियां भी इससे बेहतर हैं। खासकर छराबड़ा से फागू के बीच सड़क जगह-जगह से टूट चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कई गड्ढे तो इतने गहरे हैं कि एक से डेढ़ फीट तक नीचे चले जाते हैं। ऐसे में गाड़ी चलाना किसी जोखिम से कम नहीं है।
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सड़क किनारे बनी ड्रेन में जा गिरी पिकअप
इन गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे हो रहे हैं। हाल ही में बीते गुरुवार को कुफरी के पास गलू में एक पिकअप गाड़ी गड्ढों से बचने की कोशिश में सड़क किनारे बनी ड्रेन (नाली) में गिर गई। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं, जिससे लोगों में डर बना हुआ है।
सरकार की लापरवाही
सबसे हैरानी की बात ये है कि इस सड़क की इतनी खराब हालत होने के बावजूद न तो केंद्र सरकार कोई ठोस कदम उठा रही है और न ही राज्य सरकार। नियम के मुताबिक, नेशनल हाईवे पर टारिंग (मैटलिंग) का काम केंद्र सरकार करती है, जबकि उसकी देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। लेकिन यहां दोनों ही स्तर पर लापरवाही साफ नजर आ रही है।
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टूरिस्ट प्लेस पर सड़कों की हालत खराब
ये सड़क सिर्फ एक आम रास्ता नहीं है, बल्कि हिमाचल के सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स कुफरी और नारकंडा को जोड़ती है। हर साल यहां हजारों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं, लेकिन खराब सड़क की वजह से उनका अनुभव भी खराब हो रहा है। इसके अलावा, आसपास के गांवों और कस्बों के हजारों लोग रोज इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं, जिन्हें रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पिछले करीब दो साल से लगातार सड़क की हालत खराब
ये NH-5 करीब 8 विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ता है और इसी रास्ते से हर साल करीब 4000 करोड़ रुपये का सेब भी अलग-अलग मंडियों तक जाता है। इसके बावजूद पिछले 2 साल से सड़क की हालत खराब बनी हुई है। पिछले साल बारिश के बाद थोड़ा-बहुत पैचवर्क किया गया था, लेकिन वो भी अब उखड़ चुका है। लंबे समय से ठीक से टारिंग नहीं हुई, इसलिए धूप में धूल उड़ती है और बारिश में कीचड़ हो जाता है।
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गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा दिक्कत की बात
सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और गर्भवती महिलाओं को हो रही है, क्योंकि ऐसे रास्ते पर सफर करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऊपर से बारिश में गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे ड्राइवर को पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां ठीक है और कहां खराब। गाड़ियों के पार्ट्स भी बार-बार खराब हो रहे हैं, जिससे लोगों का खर्चा बढ़ रहा है।
10 मई से पहले पैचवर्क पूरा करने का टारगेट
वहीं NH के चीफ इंजीनियर अजय कपूर का कहना है कि ढली से छराबड़ा तक काम पूरा हो चुका है। आगे बारिश की वजह से काम रुका था, लेकिन 10 मई से पहले पैचवर्क पूरा करने का टारगेट है। उन्होंने ये भी बताया कि 86 करोड़ रुपये का प्लान (DPR) बनाकर केंद्र को भेज दिया गया है, मंजूरी मिलने के बाद सड़क की टारिंग भी कर दी जाएगी।
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सड़कों पर फिर ट्रैफिक जाम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दिल्ली लौटते ही शिमला में ट्रैफिक व्यवस्था फिर बिगड़ गई। ढली से समिट्री टनल तक सुबह ही लंबा जाम लग गया, जिससे बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को काफी परेशानी हुई। बेतरतीब पार्किंग और सब्जी मंडी की वजह से हालात और खराब हो गए, जिसके चलते कई लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके।
